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अन्ना मवेशी : राहगीरों व किसानों के लिए बने बवालेजान
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बबेरू के तिंदवारी रोड में अन्ना मवेशियों का झुंड।
- फोटो : BANDA
खेत-खलिहान से लेकर सड़कों तक अन्ना मवेशियों की धमाचौकड़ी है। राहगीर रोज दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, वहीं किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए परेशान हैं।
खेतों में फसलों को सफाचट करने व रौंदने वाले अन्ना मवेशियों के झुंड शाम होते ही सड़कों पर डेरा डाल लेते हैं। नगर में औगासी रोड, बांदा, कमासिन, अतर्रा व हरदौली रोड में जगह-जगह झुंड में बैठे मवेशी राहगीरों की राह में रोड़ा बन रहे हैं। आए दिन इनसे टकराकर राहगीर चुटहिल होते हैं। सड़कें भी गोमूत्र व गोबर से पटी रहती हैं।
शासन-प्रशासन की तमाम कवायदों के बाद भी अन्ना प्रथा पर लगाम नहीं लग पा रही। न ही इनके लिए अब तक गो आश्रय केंद्रों की व्यवस्था हो सकी और न ही शासन की प्रतिदिन 30 रुपये प्रति मवेशी संरक्षित योजना पर अमल हो पा रहा।
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किसान रातभर खेतों में फसल ताक रहे हैं। यही हाल पतवन, काजीटोला, औगासी, हरदौली, उमरहनी, कोर्रम, भदेहदू, टोलाकलां आदि गांवों का है। उधर, तहसीलदार विपिन कुमार ने बताया कि मेढ़ा और रयान गांव में दो स्थाई गोशाला और 45 अस्थाई गोशाला हैं। हालांकि वे इसमें बंद मवेशियों की संख्या नहीं बता सके।
उनका कहना है कि अन्ना मवेशियों की रोकथाम की जिम्मेदारी बीडीओ को दी गई है। दूसरी तरफ बीडीओ पीयूष मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि नगर में अन्ना पशुओं के संरक्षण की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है। गांवों में अन्ना पशुओं की रोकथाम के लिए प्रधानों के साथ रणनीति बनाई जा रही है।
अन्ना प्रथा पर रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा जनपद में 93 अस्थायी पशुबाड़े बनवाए थे। इनमें लगभग 12187 पशु रखे गए थे, लेकिन अव्यवस्थाओं और चारा-भूसा संकट के चलते अस्थायी पशुबाड़ा खत्म कर दिए गए।
इक्का-दुक्का गांवों में ही यह संचालित हैं। बिसंडा ब्लाक में छह, नरैनी में पांच, बड़ोखर खुर्द में 14, महुआ में चार, तिंदवारी में 29, बबेरू में 24, कमासिन में सात और जसपुरा में तीन अस्थायी गो आश्रय केंद्र खोले गए थे।
बिसंडा ब्लाक के रानीपुर ग्राम प्रधान भारती सिंह और ओरन ग्राम प्रधान योगेश द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन द्वारा अस्थाई पशुबाड़े से मवेशियों को छुट्टा करा दिया गया था।
अन्ना मवेशियों की धमाचौकड़ी से परेशान कुरौली गांव के किसानों ने जिलाधिकारी को अर्जी देकर रोकथाम की मांग की है। कहा है कि कर्ज लेकर खेतों में फसल बोई है। अन्ना मवेशियों के झुंड फसलों को रौंद रहे व सफाचट कर रहे हैं।
इन पर शीघ्र लगाम नहीं लगी तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। आत्महत्या को मजबूर होंगे। किसानों ने इस समस्या के निदान का अनुरोध किया है। चेतावनी दी कि शीघ्र अन्ना मवेशियों की रोकथाम को लेकर कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क जाम की जाएगी।
ज्ञापन देने वालों में संतोष तिवारी, माता प्रसाद, वेद प्रकाश, भोला, राकेश कुमार, हरिनाथ द्विवेदी, मधुकांत, अनिल कुमार, अवधेश द्विवेदी, कृष्ण कुमार द्विवेदी, योगेंद्र, राजू सहित आधा सैकड़ा से ज्यादा किसान शामिल रहे।
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खेतों में फसलों को सफाचट करने व रौंदने वाले अन्ना मवेशियों के झुंड शाम होते ही सड़कों पर डेरा डाल लेते हैं। नगर में औगासी रोड, बांदा, कमासिन, अतर्रा व हरदौली रोड में जगह-जगह झुंड में बैठे मवेशी राहगीरों की राह में रोड़ा बन रहे हैं। आए दिन इनसे टकराकर राहगीर चुटहिल होते हैं। सड़कें भी गोमूत्र व गोबर से पटी रहती हैं।
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शासन-प्रशासन की तमाम कवायदों के बाद भी अन्ना प्रथा पर लगाम नहीं लग पा रही। न ही इनके लिए अब तक गो आश्रय केंद्रों की व्यवस्था हो सकी और न ही शासन की प्रतिदिन 30 रुपये प्रति मवेशी संरक्षित योजना पर अमल हो पा रहा।
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किसान रातभर खेतों में फसल ताक रहे हैं। यही हाल पतवन, काजीटोला, औगासी, हरदौली, उमरहनी, कोर्रम, भदेहदू, टोलाकलां आदि गांवों का है। उधर, तहसीलदार विपिन कुमार ने बताया कि मेढ़ा और रयान गांव में दो स्थाई गोशाला और 45 अस्थाई गोशाला हैं। हालांकि वे इसमें बंद मवेशियों की संख्या नहीं बता सके।
उनका कहना है कि अन्ना मवेशियों की रोकथाम की जिम्मेदारी बीडीओ को दी गई है। दूसरी तरफ बीडीओ पीयूष मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि नगर में अन्ना पशुओं के संरक्षण की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है। गांवों में अन्ना पशुओं की रोकथाम के लिए प्रधानों के साथ रणनीति बनाई जा रही है।
अन्ना प्रथा पर रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा जनपद में 93 अस्थायी पशुबाड़े बनवाए थे। इनमें लगभग 12187 पशु रखे गए थे, लेकिन अव्यवस्थाओं और चारा-भूसा संकट के चलते अस्थायी पशुबाड़ा खत्म कर दिए गए।
इक्का-दुक्का गांवों में ही यह संचालित हैं। बिसंडा ब्लाक में छह, नरैनी में पांच, बड़ोखर खुर्द में 14, महुआ में चार, तिंदवारी में 29, बबेरू में 24, कमासिन में सात और जसपुरा में तीन अस्थायी गो आश्रय केंद्र खोले गए थे।
बिसंडा ब्लाक के रानीपुर ग्राम प्रधान भारती सिंह और ओरन ग्राम प्रधान योगेश द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन द्वारा अस्थाई पशुबाड़े से मवेशियों को छुट्टा करा दिया गया था।
अन्ना मवेशियों की धमाचौकड़ी से परेशान कुरौली गांव के किसानों ने जिलाधिकारी को अर्जी देकर रोकथाम की मांग की है। कहा है कि कर्ज लेकर खेतों में फसल बोई है। अन्ना मवेशियों के झुंड फसलों को रौंद रहे व सफाचट कर रहे हैं।
इन पर शीघ्र लगाम नहीं लगी तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। आत्महत्या को मजबूर होंगे। किसानों ने इस समस्या के निदान का अनुरोध किया है। चेतावनी दी कि शीघ्र अन्ना मवेशियों की रोकथाम को लेकर कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क जाम की जाएगी।
ज्ञापन देने वालों में संतोष तिवारी, माता प्रसाद, वेद प्रकाश, भोला, राकेश कुमार, हरिनाथ द्विवेदी, मधुकांत, अनिल कुमार, अवधेश द्विवेदी, कृष्ण कुमार द्विवेदी, योगेंद्र, राजू सहित आधा सैकड़ा से ज्यादा किसान शामिल रहे।