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कार्यकत्री से दुष्कर्म में सात साल कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 21 Nov 2015 11:57 PM IST
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बांदा। तमंचे के बल पर आंगनबाड़ी केंद्र में
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कार्यकत्री से दुष्कर्म करने वाले को सात वर्ष की सश्रम कैद और 10 हजार
रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। अभियुक्त तीन साल से जेल में है।
घटना देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। 14 अगस्त 2012 को सुबह करीब साढ़े सात बजे आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकत्री ताला खोलकर सफाई कर रही थी।
इसी दौरान गांव का रामजस यादव आ गया। उसके हाथ में तमंचा था। तमंचा लहराकर धमकाते हुए कार्यकत्री से कहा कि उसे दो बोरी पंजीरी दे। उसे भैंस को खिलाना है।
आंगनबाड़ी ने पंजीरी देने से मना किया तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़ लिया और तमंचा अड़ाकर जमीन पर पटक दिया। उसके साथ दुराचार किया।
जाते समय धमकी दी कि किसी को बताया या पुलिस में रिपोर्ट की तो उसे और पति को जान से मार डालेगा। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो कार्यकत्री ने अदालत की शरण ली।
धारा 156 (3) के तहत दी गई अर्जी पर अदालत ने पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी ने तफ्तीश के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
शनिवार को मुकदमे का फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश एससीएसटी हरिनाथ पांडेय ने आरोपी रामजस को धारा 376 आईपीसी में सात वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अन्य धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियुक्त पिछले तीन साल से जेल मेें है। यह अवधि सजा में समायोजित होगी।
घटना देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। 14 अगस्त 2012 को सुबह करीब साढ़े सात बजे आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकत्री ताला खोलकर सफाई कर रही थी।
इसी दौरान गांव का रामजस यादव आ गया। उसके हाथ में तमंचा था। तमंचा लहराकर धमकाते हुए कार्यकत्री से कहा कि उसे दो बोरी पंजीरी दे। उसे भैंस को खिलाना है।
आंगनबाड़ी ने पंजीरी देने से मना किया तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़ लिया और तमंचा अड़ाकर जमीन पर पटक दिया। उसके साथ दुराचार किया।
जाते समय धमकी दी कि किसी को बताया या पुलिस में रिपोर्ट की तो उसे और पति को जान से मार डालेगा। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो कार्यकत्री ने अदालत की शरण ली।
धारा 156 (3) के तहत दी गई अर्जी पर अदालत ने पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी ने तफ्तीश के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
शनिवार को मुकदमे का फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश एससीएसटी हरिनाथ पांडेय ने आरोपी रामजस को धारा 376 आईपीसी में सात वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अन्य धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियुक्त पिछले तीन साल से जेल मेें है। यह अवधि सजा में समायोजित होगी।