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केन नदी में बालू ठेकेदार का पुल तोड़ने पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 11 Apr 2015 11:26 PM IST
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लखनऊ की बालू कारोबारी महिला की फरियाद पर अदालत ने केन नदी में बक्छा घाट पर बने पीपे के पुल को तोड़े जाने पर रोक लगा दी है। शनिवार को पुल तोड़ने जा रहे प्रशासनिक अधिकारी ऐन मौके पर अदालत का आदेश मिलते ही थम गए।
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शहर से चंद किलोमीटर दूर कनवारा गांव के नजदीक बक्छा घाट में केन नदी पर काफी दिनों से पीपे का पुल बनाकर बालू भरे वाहनों को निकाला जा रहा है। यह पुल बनाने की अनुमति मंडलायुक्त और पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता ने दी थी। ग्रामीण सहित वन विभाग व कई संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे थे।
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पुल टूटने का खतरा मंडराता देख नदी के उस पार बक्छा (हमीरपुर) घाट की बालू ठेकेदार नीरजा सिंह (लखनऊ) ने यहां सिविल जज सीनियर डिवीजन के यहां याचिका दायर कर दी। इसमें नीरजा सिंह ने कहा कि वह विधवा महिला है।
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कुछ राजनैतिक पहुंच वाले लोग अफसरों को गुमराह करके आयुक्त के आदेश पर बने पीपे के पुल को तुड़वाना चाहते हैं। अगर यह विवादित पुल तोड़ दिया गया तो उसका रुपया बर्बाद हो जाएगा। वह भुखमरी की स्थिति में पहुंच जाएगी।
सुनवाई के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन नरेश कुमार ने पीपे के पुल को बालू खनन के परिवहन कार्यों में अवैधानिक रूप से हस्तक्षेप न करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि इस मामले के अंतिम निस्तारण तक पुल में हस्तक्षेप न हो। अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। यह आदेश शुक्रवार (10 अप्रैल) को जारी किया गया।
उधर, प्रशासन ने शनिवार को सुबह बक्छा घाट पुल तोड़ने की तैयारी कर ली थी। एसडीएम सदर सहित वन विभाग और पुलिस का जत्था बक्छा घाट कूच करने के लिए सिविल लाइन चौकी में दोपहर को इकट्ठा हुआ। इसी बीच एसडीएम आदि को चौकी में ही अधिवक्ता ने अदालत का आदेश थमा दिया। इस पर अधिकारी बैरंग लौट गए।