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अभ्यर्थियों ने किया अधिसूचना का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sat, 07 Jul 2018 11:48 PM IST
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प्रदर्शन करते बीटीसी व डीएलएड अभ्यर्थी।
- फोटो : अमर उजाला
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बीटीसी 2015 और डीएलएड 2017 व 2018 के अभ्यर्थियों ने शनिवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और मानव संसाधन मंत्री को सात सूत्री ज्ञापन भेजा। एडीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा कि उन्हें 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने अपनी अधिसूचना में पहली से 5वीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रारंभिक शिक्षाशास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को योग्य माना गया।
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आरटीई में यह व्यवस्था है कि डिप्लोमाधारी उपलब्ध न होने पर राज्य सरकार केंद्र को लिखेगी कि बीएड के अभ्यर्थियों को छह माह का प्रशिक्षण देकर पहली से 5वीं कक्षा में शिक्षण हेतु योग्य बनाया जाए। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 28 जून को जारी अधिसूचना में प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमा वाले अभ्यर्थियों के साथ बीएड अभ्यर्थियों को भी प्राथमिक विद्यालयों के लिए योग्य मान लिया गया है। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे प्रारंभिक शिक्षाशास्त्र में दो वर्ष का डिप्लोमा ले चुके हैं या ले रहे हैं। इसलिए वे ही प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति के योग्य हैं।
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बीएड अभ्यर्थी नई अधिसूचना से कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को पढ़ाने योग्य हो जाएंगे। कहा कि प्रदेश में लगभग 2 लाख बेरोजगार बीटीसी और डीएलएड प्रशिक्षण ले चुके हैं। अगले वर्ष इनकी संख्या 5 लाख हो जाएगी। ऐसे में डीएलएड अभ्यर्थियों को छह माह का ब्रिज कोर्स कराना निरर्थक और बीटीसी/डीएलएड अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। प्रदर्शन और ज्ञापन में जिलाध्यक्ष शशांक मिश्र सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष अभ्यर्थी शामिल रहे।
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