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Banda News: बालू की दीवार बनाकर इंटेकवेल तक पहुंचाएंगे पानी

Mon, 15 May 2023 01:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 May 2023 01:08 AM IST
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By making a wall of sand, water will reach to the intakewell
बांदा। धूप की तपन और भीषण गर्मी से केन नदी का पानी सिमटने लगा है। केन नदी के दोनों किनारों भूरागढ़ और कंचन पुरवा की तरह बने इंटेकवेल से चैनेल में पानी पहुंचाने के लिए जल संस्थान ने कवायद शुरू कर दी है। बालू की बोरियां लगाकर चैनेल तक पानी पहुंचाया जाएगा। जिससे इंटेकवेल के कुओं को भरपूर पानी मिल सके।
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जिले में कुल 39 हजार 345 कनेक्शन धारक हैं। इनमें नगरीय क्षेत्र में लगभग 27 हजार 687 और ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 11 हजार 658 उपभोक्ता हैं। पिछले वर्ष जलमूल्य के रूप में जल संस्थान ने मंडल के चारों जिलों के लगभग एक लाख 27 हजार 588 नल कनेक्शन धारकों से करीब 12 करोड़ 76 लाख रुपये वसूले थे। इसमें जलापूर्ति सुचारू रखने के लिए 9.30 करोड़ रुपये खर्च हो गए। अब केन नदी का पानी सिमटने से जल प्रभाव कमजोर हो गया। इंटेकवेल से जुड़े चैनलों में कम पानी आने से जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। अब जल संस्थान बालू भरी बोरियों के जरिए नालियां बनाकर चैनल के माध्यम से इंटेकवेलों तक पानी पहुंचाने की तैयारी में जुट गया है।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा में केन नदी से लगभग 19 एमएलडी पानी मिल रहा है। नदी सिमटने से करीब डेढ़ एमएलडी पानी कम मिल रहा है। बालू की दीवार बनाकर पानी इंटेकवेल तक पहुंचाया जाएगा।
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मंडल में कनेक्शन धारकों की संख्या
जिला
नगरीय
ग्रामीण
कुल
बांदा

27687
11658
39345
चित्रकूट
12175
11159
23334
हमीरपुर
30508
16665
47173
महोबा
13918
3818
17736
योग

84288
43300
127588


नाले में तब्दील होती जा रही बागै नदी
बदौसा। जिले की प्रमुख नदियों में शामिल बागै नदी का जल स्तर गर्मी में बेहद घट गया है। जल प्रवाह की कमी से नदी नाले में तब्दील होती जा रही है। दर्जनों गांवों के लिए जीवनदायिनी बनी नदी की धारा कम होने से जल संकट का खतरा मंडराएगा।
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से निकली बागै नदी के दोनों किनारों पर लगभग दर्जनों गांव आबाद हैं। नदी के पानी से ही जीवन-यापन होता है। माना जाता है कि पन्ना से निकली इस नदी में पत्थरों के साथ हीरे भी मिलते हैं। मई माह की गर्मी में नदी का पानी काफी घट गया है। पतली जलधारा हो गई। बालू खनन से नदी का अस्तित्व मिटता जा रहा है। पहले नदी में नाव के जरिए लोग आर-पार जाते थे, लेकिन अब पैदल ही पार कर जाते हैं। यही हाल रहा तो नदी किनारे आबाद गांवों को पानी का संकट हो जाएगा। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर नदी का अस्तित्व बचाने की मांग की है।



केन नदी का जल स्तर कम हुआ है। मई में पानी कम होने से इंटेकवेल में पानी पर्याप्त नहीं पहुंच पाता। बालू की दीवार बनाकर चैनल के माध्यम से इंटेकवेलों तक पानी पहुंचाया जाएगा। जिससे शहर की जलापूर्ति प्रभावित न हो सके।
-पुरुषोत्तम कुमार, महाप्रबंधक, जल संस्थान, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।
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