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मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा बुंदेलखंड

Wed, 31 Oct 2018 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Wed, 31 Oct 2018 11:39 PM IST
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Bundelkhand will become self-sufficient in fish seed production
ललितपुर जिले में बनाई गई हेचरी। - फोटो : अमर उजाला

बुंदेलखंड में मछली के बीज की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार की नीली क्रांति योजना के तहत सात नई हेचरी बनाई जाएंगी। 25 लाख रुपये की लागत से एक हेचरी बनेगी। इसमें 10 लाख का अनुदान सरकार देगी। शेष 15 लाख रुपये मछली पालक को खुद लगाने होंगे। नई हेचरी के बाद बुंदेलखंड में सात करोड़ बीज उत्पादन की क्षमता बढ़ जाएगी। 

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बुंदेलखंड में डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मछली का पालन हो रहा है, लेकिन पर्याप्त बीज उत्पादन न होने से लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर से बीज मंगाना पड़ रहा है। बुंदेलखंड में अभी छह हेचरी हैं। अब शासन ने नीली क्रांति योजना से झांसी और ललितपुर में दो-दो और बांदा, चित्रकूट, महोबा में एक-एक नई हेचरी निर्माण की मंजूरी दी है। इसे लक्ष्य में शामिल कर लिया गया है। झांसी व ललितपुर में एक-एक हेचरी बनकर तैयार हो गई है।
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शेष जिलों में काम चल रहा है। बुंदेलखंड में जलाशयों और तालाबों में प्रति वर्ष औसतन लगभग 15 से 20 करोड़ मत्स्य बीज की खपत है, लेकिन यहां सिर्फ छह करोड़ बीज का ही उत्पादन हो रहा है। नई हेचरी की प्रति इकाई लागत 25 लाख रुपये है। इसमें स्पानिंग पूल, दो हेचिंग पूल, एक स्पानिंग कलेक्शन पूल व सात नर्सरी बनाई जाएंगी। एक हेचरी दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनेगी। इसमें तीन कमरे भी बनाए जाएंगे। ट्यूबवेल भी लगेगा। योजना के तहत सरकार द्वारा दस लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा। बाकी 15 लाख रुपये मछली पालक को लगाने होंगे।  
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बुंदेलखंड में नीली क्रांति योजना से मत्स्य बीज उत्पाद क्षमता बढ़ाने के लिए सात नई हेचरी बनाई जा रही है। इनके निर्माण के बाद जलाशयों के लिए मछली के बीज बाहर से नहीं मंगाने पड़ेंगे। उत्पादन में बुंदेलखंड खुद सक्षम हो जाएगा।  

- ज्ञानेंद्र सिंह, उप निदेशक, मत्स्य, झांसी/चित्रकूटधाम मंडल।
 
1.47 लाख हेक्टेयर हो रहा मछली पालन 
बांदा। बुंदेलखंड में सबसे अधिक मछली पालन बड़े जलाशयों (बांधो) में होता है। बांदा के रनगवां में 2592 हेक्टेयर, बरियारपुर में 778 हेक्टेयर, झांसी के बड़वाल में 1000, पहाड़ी में 1109, पहुंच में 5018, पारीक्षा में 778, लहचुरा में 494, ललितपुर के माता टीला में 5000, मानसरोवर मे 129, चित्रकूट के बरुआ में 1154, ओहन में 896, मानिकपुर डैम में 76, हेला में 84, खप्टिहा में 180, महोबा के मझगवां व कबरई में 480-480, केवलारी में 302, रायपुरा में 295, सलारपुर में 337, कमालपुर में 198, किड़ारी में 40 हेक्टेयर में मछली पाली जाती हैं। झांसी मंडल में 1653, और चित्रकूटधाम मंडल में 3045 हेक्टेअर तालाबों में मछली पालन होता है। 
 
 

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