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नदी, नीर और नारी सम्मान से बुंदेलखंड बनेगा पानीदार
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नदी, नारी, नीर राष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में मीडिया को जानकारी देते शोध छात्र रामबाबू तिवारी।
- फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड को पानीदार बनाने के लिए नदी, नीर और नारी का सम्मान जरूरी है। झरनों और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर होने पर भी बुंदेलखंड को वो पहचान नहीं मिल पा रही जो उसका अधिकार है। इसी पृष्ठभूमि को लेकर 12 दिसंबर को जनपद के बदौसा में नदी, नीर व नारी सम्मेलन होगा।
ये बातें सोमवार को प्रेस क्लब में मीडिया से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र और तालाब बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक तथा सम्मेलन आयोजक रामबाबू तिवारी ने कहीं। उन्होंने कहा कि अपने स्वभाव और व्यवहार से हम धीरे-धीरे जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं। मानव संस्कृति की आधार नदियां सिसक रही हैं। छोटी नदियां विलुप्त हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि नदी, नारी, नीर सम्मेलन गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान के शोध छात्रों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड को सूखा और बाढ़ से मुक्ति दिलाना है। जिले की छोटी नदी बागै भी जीवनदायिनी है। इसे आधार मानकर यह जन संवाद किया जा रहा है।
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बागै भक्त परिषद संयोजक शाहनवाज खां शानू ने कहा कि बागै मध्य प्रदेश के पन्ना से शुरू होकर धरमपुर के पास बृहस्पति कुंड में मिली है। यहां कई कुंड और झरने हैं। चट्टानों में पुराने शैल चित्र हैं। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मोहन धुरिया ने कहा कि हम बारिश का 15 फीसदी पानी भी उपयोग नहीं कर पाते। जल संकट का सबसे बड़ा समाधान तालाब है। मीडिया वार्ता में अभिषेक, चंदन धुरिया, विष्णु, ज्योति, पूजा आदि शामिल रहे।
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ये बातें सोमवार को प्रेस क्लब में मीडिया से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र और तालाब बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक तथा सम्मेलन आयोजक रामबाबू तिवारी ने कहीं। उन्होंने कहा कि अपने स्वभाव और व्यवहार से हम धीरे-धीरे जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं। मानव संस्कृति की आधार नदियां सिसक रही हैं। छोटी नदियां विलुप्त हो रही हैं।
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उन्होंने कहा कि नदी, नारी, नीर सम्मेलन गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान के शोध छात्रों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड को सूखा और बाढ़ से मुक्ति दिलाना है। जिले की छोटी नदी बागै भी जीवनदायिनी है। इसे आधार मानकर यह जन संवाद किया जा रहा है।
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बागै भक्त परिषद संयोजक शाहनवाज खां शानू ने कहा कि बागै मध्य प्रदेश के पन्ना से शुरू होकर धरमपुर के पास बृहस्पति कुंड में मिली है। यहां कई कुंड और झरने हैं। चट्टानों में पुराने शैल चित्र हैं। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मोहन धुरिया ने कहा कि हम बारिश का 15 फीसदी पानी भी उपयोग नहीं कर पाते। जल संकट का सबसे बड़ा समाधान तालाब है। मीडिया वार्ता में अभिषेक, चंदन धुरिया, विष्णु, ज्योति, पूजा आदि शामिल रहे।