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बुंदेलखंड में सब सामान्य!
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
Updated Tue, 01 Mar 2016 11:29 PM IST
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सूखे बुंदेलखंड में फसल की बर्बादी पर किसी किसान ने न तो आत्महत्या की है और न ही किसी की सदमे से मौत हुई है। सच्चाई से कोसों दूर यह रिपोर्ट चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों के प्रशासन ने प्रदेश सरकार को भेजी है। इतना ही नहीं दैवी आपदा, भूख, खाद्यान्न की कमी, बिजली-पानी जैसे तमाम मुद्दों पर सब कुछ ठीक बताने वाले मनगढ़ंत आंकड़े दिए गए हैं। इन्हीं के सहारे सरकार 8 मार्च को विधानसभा में विपक्षी दलों का मुंह बंद करने की कोशिश करेगी।
विधानसभा के सत्र में विपक्षी दलों ने बुंदेलखंड में सूखे के मुद्दे पर काफी हंगामा किया, साथ ही विधानसभा के नियम-52 के तहत इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग की थी। प्रदेश सरकार ने एक घंटे की चर्चा स्वीकार कर ली है। इसकी तैयारी के लिए प्रदेश के सचिव एवं राहत आयुक्त ने बुंदेलखंड के सभी जिलाधिकारियों से नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। सभी जिलाधिकारियों ने आनन-फानन यह रिपोर्ट तैयार कर ली। इसे शासन को भेजा जा रहा है। 8 मार्च को सदन में होनी वाली चर्चा में प्रदेश सरकार के मंत्री इन्हीं आंकड़ों की बाजीगरी से किरकिरी बचाने की कोशिश करेंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मंडल के चारों जिलों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगभग 39 हजार मीट्रिक टन गेहूं, चावल गरीबों को बांटा जा चुका है। 1573 तालाब खुद गए हैं। शहरों में बिजली 20 से 22 और गांवों में 15 से 18 घंटे दी जा रही है। खाद्यान्न मद से भी लगभग 10 हजार गरीब, निराश्रित, असहाय लोगों को राशन दिया जा रहा है।
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देश सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आठवें बिंदु में किसानों की आत्महत्या से संबंधित जानकारी मांगी गई है। इस पर चारों जिलों के प्रशासन ने रिपोर्ट दी है कि दैवी आपदा या भूख आदि से एक भी किसान की आत्महत्या या मौत नहीं हुई है। चारों जिलों के अपर जिलाधिकारियों ने यह रिपोर्ट प्रदेश शासन को भेज दी है।
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विधानसभा के सत्र में विपक्षी दलों ने बुंदेलखंड में सूखे के मुद्दे पर काफी हंगामा किया, साथ ही विधानसभा के नियम-52 के तहत इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग की थी। प्रदेश सरकार ने एक घंटे की चर्चा स्वीकार कर ली है। इसकी तैयारी के लिए प्रदेश के सचिव एवं राहत आयुक्त ने बुंदेलखंड के सभी जिलाधिकारियों से नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। सभी जिलाधिकारियों ने आनन-फानन यह रिपोर्ट तैयार कर ली। इसे शासन को भेजा जा रहा है। 8 मार्च को सदन में होनी वाली चर्चा में प्रदेश सरकार के मंत्री इन्हीं आंकड़ों की बाजीगरी से किरकिरी बचाने की कोशिश करेंगे।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि मंडल के चारों जिलों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगभग 39 हजार मीट्रिक टन गेहूं, चावल गरीबों को बांटा जा चुका है। 1573 तालाब खुद गए हैं। शहरों में बिजली 20 से 22 और गांवों में 15 से 18 घंटे दी जा रही है। खाद्यान्न मद से भी लगभग 10 हजार गरीब, निराश्रित, असहाय लोगों को राशन दिया जा रहा है।
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देश सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आठवें बिंदु में किसानों की आत्महत्या से संबंधित जानकारी मांगी गई है। इस पर चारों जिलों के प्रशासन ने रिपोर्ट दी है कि दैवी आपदा या भूख आदि से एक भी किसान की आत्महत्या या मौत नहीं हुई है। चारों जिलों के अपर जिलाधिकारियों ने यह रिपोर्ट प्रदेश शासन को भेज दी है।