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राखी के उपहार में मांगी बकस्वाहा की हरियाली

Wed, 25 Aug 2021 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 11:27 PM IST
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Buckwheat greenery sought in the gift of Rakhi
बांदा बकस्वाहा जंगल की चट्टानों में दुर्लभ शैल चित्र। विज्ञप्ति - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड में बकस्वाहा जंगल के पेड़ों और बेहद दुर्लभ शैल चित्रों (रॉक पेटिंग) को हीरा खदान की भेंट चढ़ने से बचाने के लिए पर्यावरण पैरोकार तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर बड़ी तादाद में महिलाओं ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को डाक के जरिए रक्षा सूत्र भेजा है। साथ में पत्र हैं। इसमें बकस्वाहा के 2 लाख से ज्यादा पेड़ों की हरियाली बरकरार रखने का वचन राखी के उपहार के तौर पर मांगा है।
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पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि बकस्वाहा में पाए गए शैल चित्र आदि मानव की 46 प्रजातियों के हैं। यह रॉक पेटिंग लाल रंग से चट्टानों पर उकेरी गईं हैं। इन्हें संरक्षित करने और पुरातत्व विभाग द्वारा रिसर्च किए जाने की जरूरत है। यह शैल चित्र और जंगल बकस्वाहा को पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित कर सकते हैं। रोजगार भी मिलेगा।
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कहा गया है कि शैल चित्रों में लाल रंग की एक रॉक पेटिंग आग की खोज से भी पहले की बताई गई है। दूसरा शैल चित्र पाषाण युग से मध्य काल के बीच का है। यह लाल रंग और चारकोल से बनाया गया है। तीसरी रॉक पेटिंग मानव इतिहास को दर्शाती है। इसमें पहाड़ों और गुुफाओं पर युद्ध के चित्र बनाए गए हैं।
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पर्यटन स्थल के रूप में करें विकसित
पर्यावरण प्रेमियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अनुरोध किया है कि बकस्वाहा जंगल क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें। इससे राजस्व मिलेगा। शैल चित्र अमूल्य धरोहर हैं। बिड़ला जैसे बिजनेस मैन इसकी कीमत कभी नहीं चुका पाएंगे। यहां से खजुराहो भी नजदीक है। जहां अक्सर देश-विदेश के पर्यटक आते रहते हैं।
जंगल काटना कहां की बुद्धिमानी
बांदा। मीडिया क्षेत्र में सक्रिय विजया पाठक कहतीं हैं कि बकस्वाहा के जंगल को काटकर राजस्व बढ़ाना कहां की बुद्धिमानी है? यहां के लोग जंगल और अपनी जमीन बचाने को लगातार संघर्ष कर रहे हैं। वह करीब 48 घंटे इन लोगों के साथ रहीं हैं। उनका दर्द जाना है।

मध्य प्रदेश सरकार हीरा खनन के लिए बकस्वाहा जंगल को बिड़ला समूह को दे चुकी है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। पुरातत्वविद प्रोफेसर एसके झारी ने अपने शोध पत्र में यहां के शैल चित्रों की उम्र बताई हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता अमित भटनागर, डॉ. धर्मेंद्र, राजेश यादव, शरद कुमरे, बहादुर, अनुज विश्नोई इत्यादि जंगल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

बांदा :  पर्यावरण प्रेमियों द्वारा लिखे गए पत्र और रक्षा सूत्र। विज्ञप्ति

बांदा : पर्यावरण प्रेमियों द्वारा लिखे गए पत्र और रक्षा सूत्र। विज्ञप्ति - फोटो : BANDA

बांदा :  मुख्यमंत्री को भेजने के लिए तैयार किए गए पत्र और रक्षा सूत्र के लिफाफे। विज्ञप्ति

बांदा : मुख्यमंत्री को भेजने के लिए तैयार किए गए पत्र और रक्षा सूत्र के लिफाफे। विज्ञप्ति - फोटो : BANDA

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