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बैगन में झुलसा रोग, वैज्ञानिक ने बताया बचाव
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बांदा। बैगन की फसल में इन दिनों फोमोप्सिस झुलसा रोग लग रहा है। यह बहुत हानिकारक है। पौधों की पत्तियों पर छोटे-छोटे गोल भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं। पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। फलों पर धूल के कणों की तरह भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। यह बैगन के फल को सड़ाकर गिरा देते हैं।
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा.मंजुल पांडेय ने गुरुवार को कुछ गांवों में बैगन की फसल का जायजा लिया। बताया कि बड़ोखर, महुआ, नरैनी, तिंदवारी आदि क्षेत्रों से यह शिकायत ज्यादा आ रही है।
बैगन की तीन प्रजातियों में यहां लगभग पूरे वर्ष पैदा होता है। उन्होंने कहा कि समय से प्रबंधन न किया गया तो यह रोग किसानों को काफी आर्थिक नुकसान पहुंचा देता है। रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़कर जला दें।
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जिन या मैनकोजेब या बीटाबेक्स की 30 ग्राम प्रति टंकी में मिलाकर छिड़काव करें। 7 से 10 दिन बाद फिर छिड़काव करते रहें। उन्होंने बताया कि तना और फल भेदक कीट का भी प्रकोप हो रहा है।
इसके लिए प्रोफोनोफास एक से दो लीटर प्रति हेक्टेयर या थायडिकार्ब 600 ग्राम प्रति लीटर या कार्बो फ्यूरॉन 2 से 3 किलो प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। श्री पांडेय ने बड़ोखर खुर्द के बैगन किसानों को कृषि रसायन का मुफ्त वितरण किया। इस दौरान उनके साथ प्रगतिशील किसान विज्ञान शुक्ला, राहुल व घनश्याम यादव भी थे।
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कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा.मंजुल पांडेय ने गुरुवार को कुछ गांवों में बैगन की फसल का जायजा लिया। बताया कि बड़ोखर, महुआ, नरैनी, तिंदवारी आदि क्षेत्रों से यह शिकायत ज्यादा आ रही है।
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बैगन की तीन प्रजातियों में यहां लगभग पूरे वर्ष पैदा होता है। उन्होंने कहा कि समय से प्रबंधन न किया गया तो यह रोग किसानों को काफी आर्थिक नुकसान पहुंचा देता है। रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़कर जला दें।
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जिन या मैनकोजेब या बीटाबेक्स की 30 ग्राम प्रति टंकी में मिलाकर छिड़काव करें। 7 से 10 दिन बाद फिर छिड़काव करते रहें। उन्होंने बताया कि तना और फल भेदक कीट का भी प्रकोप हो रहा है।
इसके लिए प्रोफोनोफास एक से दो लीटर प्रति हेक्टेयर या थायडिकार्ब 600 ग्राम प्रति लीटर या कार्बो फ्यूरॉन 2 से 3 किलो प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। श्री पांडेय ने बड़ोखर खुर्द के बैगन किसानों को कृषि रसायन का मुफ्त वितरण किया। इस दौरान उनके साथ प्रगतिशील किसान विज्ञान शुक्ला, राहुल व घनश्याम यादव भी थे।