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Banda News: मासूम के गले से बिना चीरा लगाए निकला पीतल का लॉकेट
Sat, 11 Apr 2026 11:29 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 11 Apr 2026 11:29 PM IST
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बांदा। रानी दुर्गावती चिकित्सा महाविद्यालय के सह आचार्य और नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र सिंह ने एक डेढ़ वर्षीय मासूम की जान बचाई है। उन्होंने बच्चे के गले में फंसे पीतल के त्रिशूल लॉकेट को बिना चीरा लगाए दूरबीन पद्धति से सफलतापूर्वक निकाला।
नरैनी क्षेत्र के धोबन पुरवा निवासी डेढ़ वर्ष के मयंक के गले की खाने की नली में पीतल का त्रिशूल लॉकेट फंस गया था। मयंक की मां जयंती उसे छतरपुर और झांसी के कई अस्पतालों में ले गईं लेकिन सभी ने लॉकेट निकालने में असमर्थता जताई। 10 अप्रैल को जयंती अपने बच्चे को लेकर बांदा के कैलाश मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पहुंची जहां डॉ. भूपेंद्र सिंह ने यह जटिल ऑपरेशन किया।
डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि लॉकेट नुकीला होने के कारण खाने की नली को जख्मी कर रहा था और ऑपरेशन के दौरान भी बच्चे की जान को खतरा था। लगभग डेढ़ घंटे की मेहनत के बाद टीम ने बिना चीरा लगाए दूरबीन पद्धति से लॉकेट निकालने में सफलता प्राप्त की जिससे बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।
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नरैनी क्षेत्र के धोबन पुरवा निवासी डेढ़ वर्ष के मयंक के गले की खाने की नली में पीतल का त्रिशूल लॉकेट फंस गया था। मयंक की मां जयंती उसे छतरपुर और झांसी के कई अस्पतालों में ले गईं लेकिन सभी ने लॉकेट निकालने में असमर्थता जताई। 10 अप्रैल को जयंती अपने बच्चे को लेकर बांदा के कैलाश मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पहुंची जहां डॉ. भूपेंद्र सिंह ने यह जटिल ऑपरेशन किया।
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डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि लॉकेट नुकीला होने के कारण खाने की नली को जख्मी कर रहा था और ऑपरेशन के दौरान भी बच्चे की जान को खतरा था। लगभग डेढ़ घंटे की मेहनत के बाद टीम ने बिना चीरा लगाए दूरबीन पद्धति से लॉकेट निकालने में सफलता प्राप्त की जिससे बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।
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