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खुले में फेंका जा रहा बायो मेडिकल कचरा
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अस्पताल परिसर में गड्ढे में फेंका गया कचरा।
- फोटो : BANDA
बांदा। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल परिसर में बायो मेडिकल वेस्ट कचरा खुले स्थानों पर फेंका जा रहा है। आवारा पशु मुंह मारकर मेडिकल कचरे को इधर-उधर बिखेर रहे हैं। इससे मरीजों के साथ ही तीमारदारों अथवा यहां आने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। दोनों अस्पतालों के जिम्मेदार इस गंदगी के लिए एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इसका निस्तारण भूरागढ़ गांव स्थित प्राइवेट एजेंसी के जरिए कराया जा रहा है। हालांकि हकीकत कुछ और है। मेडिकल कचरा बड़ी मात्रा में मोर्चरी के पास दो बड़े गड्ढों में फेंका जा रहा है। अस्पताल प्रशासन इस कचरे को वार्डों से निकलने वाली गंदगी और खाना आदि बता रहा है, जबकि इसमें खून सनी पट्टियां, सुइयां, आपरेशन में इस्तेमाल किए गए ग्लब्स और कपड़े आदि होते हैं।
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डा. एसएन मिश्र ने कहा कि अस्पताल से निकलने वाला कचरा परिसर में बने बंद कमरे में रखा जाता है। इसे तीन श्रेणी में बांटा गया है। ब्लड किट, ड्रिप सहित सभी प्लास्टिक कचरा लाल और पट्टी, रुई व आपरेशन से निकलने वाले मानव अंग को पीले तथा सीरिंज व नुकीली चीजें नीले रंग में रखी जाती हैं। इसका निस्तारण एक प्राइवेट कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
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गड्ढे में मरीजों का खाना व अन्य गंदगी फेंकी जाती है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. सुनीता सिंह ने कहा कि महिला अस्पताल का कचरा निस्तारण एक प्राइवेट कंपनी की ओर से किया जा रहा है। रोजाना उनका वाहन कचरा ले जाता है। पुरुष अस्पताल का कचरा गड्ढों में फेंका जाता है। सोमवार को उन्होंने जेई के साथ निरीक्षण किया है। कचरा फेंकने वाले स्थान में पार्क और पार्किंग के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
रोजाना बड़ी मात्रा में निकलता है कचरा
जिला अस्पताल में हर दिन एक हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। इसी तरह महिला अस्पताल में भी रोजाना लगभग 500 मरीज आते हैं। इनमें कई भर्ती किए जाते हैं। रोजाना इमरजेंसी, आपरेशन, प्रसव और वार्डों आदि से बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरा निकलता है।
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अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इसका निस्तारण भूरागढ़ गांव स्थित प्राइवेट एजेंसी के जरिए कराया जा रहा है। हालांकि हकीकत कुछ और है। मेडिकल कचरा बड़ी मात्रा में मोर्चरी के पास दो बड़े गड्ढों में फेंका जा रहा है। अस्पताल प्रशासन इस कचरे को वार्डों से निकलने वाली गंदगी और खाना आदि बता रहा है, जबकि इसमें खून सनी पट्टियां, सुइयां, आपरेशन में इस्तेमाल किए गए ग्लब्स और कपड़े आदि होते हैं।
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जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डा. एसएन मिश्र ने कहा कि अस्पताल से निकलने वाला कचरा परिसर में बने बंद कमरे में रखा जाता है। इसे तीन श्रेणी में बांटा गया है। ब्लड किट, ड्रिप सहित सभी प्लास्टिक कचरा लाल और पट्टी, रुई व आपरेशन से निकलने वाले मानव अंग को पीले तथा सीरिंज व नुकीली चीजें नीले रंग में रखी जाती हैं। इसका निस्तारण एक प्राइवेट कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
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गड्ढे में मरीजों का खाना व अन्य गंदगी फेंकी जाती है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. सुनीता सिंह ने कहा कि महिला अस्पताल का कचरा निस्तारण एक प्राइवेट कंपनी की ओर से किया जा रहा है। रोजाना उनका वाहन कचरा ले जाता है। पुरुष अस्पताल का कचरा गड्ढों में फेंका जाता है। सोमवार को उन्होंने जेई के साथ निरीक्षण किया है। कचरा फेंकने वाले स्थान में पार्क और पार्किंग के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
रोजाना बड़ी मात्रा में निकलता है कचरा
जिला अस्पताल में हर दिन एक हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। इसी तरह महिला अस्पताल में भी रोजाना लगभग 500 मरीज आते हैं। इनमें कई भर्ती किए जाते हैं। रोजाना इमरजेंसी, आपरेशन, प्रसव और वार्डों आदि से बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरा निकलता है।