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जांच अधिकारी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पेश की रिपोर्ट में किया खुलासा,अवैध खनन दे दनादन

Sun, 18 Jan 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sun, 18 Jan 2015 11:39 PM IST
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Being fiercely illegal mining

वैध खदानों में भी अवैध खनन दे दनादन जारी है। कुछ दिनों पूर्व यहां आए एनजीटी के जांच अधिकारी (सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता) ने निर्धारित क्षेत्रफल से बाहर खनन खनन का खेल पकड़ा था।

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उन्होंने एनजीटी में दाखिल की अपनी जांच रिपोर्ट में भी अवैध खनन का खुलासा किया है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक के तमाम आदेशों की परवाह किए बगैर खनन का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
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अवैध खनन के खिलाफ लगातार शिकायतें करने वाले प्रवास सोसायटी के आशीष सागर और एनजीटी में रिट दायर करने वाले समाजसेवी ब्रजमोहन यादव का कहना है कि जनपद के सभी मौजूदा 12 पट्टों में एनओसी मात्र 11,13,425 घन मीटर की गई है, लेकिन खनन इससे दो या तीन गुना ज्यादा हो चुका है।
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खनिज और प्रशासन के अधिकारी भी इससे बखूबी वाकिफ हैं, लेकिन सिंडिकेट की ताकत के आगे कार्रवाई करने से बचते हैं। दरअसल खनिज विभाग ने जनपद के एक दर्जन पट्टाधारकों के अलग-अलग पट्टों में 784.67 एकड़ का पट्टा दे रखा है। इनमें पूरी अवधि तक मात्र 11,13,425 घन मीटर बालू निकालने की अनुमति दी गई है, लेकिन लगभग सभी खदानों में निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक खनन हुआ है। इसकी शिकायतें लगातार हो रही हैं।

खनिज विभाग ने बांदा जनपद की पांच तहसीलों बांदा सदर, नरैनी, बबेरू, अतर्रा और पैलानी में खदानों के पट्टे कर रखे हैं। ज्यादातर पट्टे पिछले दो वर्षों वर्ष 2013 व 2014 में हुए हैं। अगले वर्ष 2016 में इनकी अवधि समाप्त हो रही है। सबसे बड़े क्षेत्रफल 168.75 एकड़ का पट्टा सदर तहसील के अछरौड़ में केन नदी घाट का है।

दूसरे नंबर पर 107.91 एकड़ का पट्टा नरैनी तहसील के कोलावल रायपुर का है। क्षेत्रफल के हिसाब से तीसरा बड़ा पट्टा 107.10 एकड़ सदर तहसील के खप्टिहा कलां (केन नदी) खदान का है।

सदर तहसील के ही पैलानी घाट में 103.62 एकड़ का पट्टा केन नदी घाट का है। अन्य सभी पट्टों का क्षेत्रफल दहाई अंकों में है यानि 100 एकड़ से कम है। पर्यावरण विभाग पट्टाधारकों को बालू खनन की मात्रा निर्धारित करता है।

पर्यावरण निदेशालय हर पट्टे में घन मीटर में यह मात्रा निर्धारित करता है। एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) में यह मात्रा साफ दर्ज होती है, लेकिन अधिकांश घाटों में एनओसी में निर्धारित की गई मात्रा से ज्यादा खनन हुआ है।

जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से रात दिन निकाली जा रही बालू में पर्यावरण निदेशालय के उस शर्त का भी उल्लंघन हो रहा है, जिसमें बालू खनन तीन मीटर से ज्यादा गहरा नहीं किया जा सकता।

अपर जिला मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी खनिज डीएस पांडेय का इस संबंध में कहना है कि पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन अवैध की शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।

अवैध खनन पाया गया तो पट्टा धारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि खजिन अधिकारी को भी इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। खनिज सर्वेयर का भी दायित्व है कि समय-समय पर जांच करते रहें।


इन खदानों से इतने खनन का ही अधिकार
पर्यावरण विभाग द्वारा पट्टा धारकों को जारी की गई बालू खनन की मात्रा (एनओसी) सबसे ज्यादा 2.25 लाख घन मीटर की अनुमति खप्टिहा और पैलानी खदानों को मिली है।

कोलावल रायपुर (नरैनी) खदान को 1.35 लाख, सादी मदनपुर (पैलानी) घाट को 1.31 लाख, अछरौड़ खदान को 90 हजार बरहेटा (पैलानी) खदान को 56,500, राघौवपुर (बबेरू) खदान को 63,000, कनवारा (बांदा) खदान को 90,000, पहड़िया खुर्द (अतर्रा) खदान को 45,000 , नसेनी (नरैनी) खदान को 25,000 डिघवट (बांदा) खदान को 5725, पथरा (नरैनी) खदान को 22,200 घन मीटर बालू खनन की एनओसी/अनुमति मिली है।

एनजीटी ने पट्टा धारकाें से मांगा हलफनामा
जनपद में हो रहे अवैध खनन के मामले की सुनवाई कर रही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पट्टा धारक से इस बात का हलफनामा मांगा है कि पट्टा प्रतिबंधित क्षेत्र का है या नहीं?

ट्रिब्यूनल बेंच ने डीएम और पुलिस अधीक्षक को बेंच में उपस्थित होने के मामले में ढील देते हुए कहा है कि अब उन्हें उपस्थित होने की जरूरत नहीं है। इस सुनवाई के दौरान बांदा के पुलिस अधीक्षक और खनिज अधिकारी ट्रिब्यूनल बेंच में उपस्थित थे।

11 फरवरी को अगली सुनवाई
बृजमोहन यादव की याचिका पर एनजीटी में सुनवाई चल रही है। हाल ही में निर्धारित तिथि पर ट्रिब्यूनल की बेंच में नरैनी क्षेत्र के नसेनी गांव के मामले में सुनवाई करते हुए पट्टा घाट संख्या 9 व 10 के पट्टा धारक को आदेश दिया है कि अपने पट्टे की चौहद्दी दर्ज कर पेश करें।

साथ ही पक्षकार यह हलफनामा भी दाखिल करें कि पट्टा नदी की तलहटी का था या खेती की जमीन का? एनजीटी इस मामले में अगली सुनवाई 11 फरवरी को करेगी।

‘बाधित अवधि’ के खेल में ठेकेदारों की बल्ले-बल्ले
बालू के पट्टों में ‘बाधित अवधि’ का भी खूब खेल होता है। इसकी आड़ में पट्टे की मियाद खत्म होने के बाद भी खदानों मेें खनन होता रहता है। दरअसल पट्टा अवधि के दौरान एनओसी न मिलने या किसी अन्य तकनीकी कारण से खनन बंद हो जाए तो जितने दिन खनन बंद रहेगा वो दिन पट्टा अवधि के बाद बढ़ जाएंगे।


ऐसे में होशियार बालू कारोबारी  खनिज विभाग की मिलीभगत से फाइलों में खदानों को बंद दर्शा कर खनन कराते रहते हैं। पट्टा अवधि खत्म होने के बाद भी बाधित अवधि के बराबर खनन कराया जाता है। ऐसे मेें अक्सर पट्टा धारक को पट्टा अवधि से दोगुना समय खनन का मिल जाता है।

गौरतलब है कि जनपद के सभी 12 बालू खदान पट्टे अगले वर्ष 2016 मेें खत्म हो जाएंगे, लेकिन बाधित अवधि का खेल चलता रहेगा।



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