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खुद कंगाल होकर किसान बीमा कंपनियों को कर रहे मालामाल

Sat, 22 Feb 2020 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2020 11:45 PM IST
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Being a pauper himself, farmers are doing insurance to insurance companies
प्रोम सिंह। - फोटो : BANDA
बांदा। बैंक से कर्ज लेने वाले किसान ही बीमा कंपनियों के विधाता हैं। खुद पर करोड़ों रुपये का कर्ज चढ़ाकर बीमा कंपनियों को मालामाल कर रहे हैं। सरकार भी बीमा कंपनियों के साथ खड़ी नजर आ रही है, वरना बैंक से कर्ज लेने में किसानों को बीमा की शर्त लागू न की जाती। बीमा के आंकड़े इसके गवाह हैं। बीमित किसानों में एक फीसदी भी गैर कर्जदार किसान नहीं हैं।
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केंद्रीय कैबिनेट ने फसल बीमा योजना किसानों की स्वेच्छा पर करने का फैसला लेकर किसानों को बड़ी राहत दी है। यह बात अधिकांश किसानों की जुबां पर है। बीमा कंपनियां किसानों को कंगाल बनाकर खुद कैसे मालामाल होती हैं इसकी बानगी पिछले वर्ष (2018) की खरीफ और 2018-19 की रबी फसलें हैं। खरीफ में तत्कालीन बीमा कंपनी एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने कुल 52,672 किसानों की फसलों का बीमा किया।
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इसमें 52,362 किसान बैंक के कर्जदार थे। बिना कर्ज वाले मात्र 310 किसानों ने ही फसल बीमा कराया। कंपनी ने इन किसानों की फसलों का 1 अरब 36 करोड़ 13 लाख रुपये का बीमा किया। इसकी प्रीमियम किसानों से 2.72 करोड़ ली गई। 6.93 करोड़ केंद्र सरकार ने और 6.93 करोड़ राज्य सरकार ने प्रीमियम अदा की। सरकारों ने 13 करोड़ 87 लाख प्रीमियम अदा किया। लाभान्वित किसानों की संख्या मात्र सौ ही है। उन्हें क्लेम के रूप में 31 करोड़ 66 लाख रुपये मिले। लाभान्वित किसानों का प्रतिशत बीमित किसानों में एक फीसदी भी नहीं रहा।
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पिछले वर्ष की रबी फसल का भी कमोवेश यही हाल रहा। कुल 55,855 किसानों ने बीमा कराया। इसमें 55,106 कर्जदार किसान और मात्र 749 गैर कर्जदार किसान थे। 1 अरब 58 करोड़ 8 लाख रुपये का बीमा हुआ। कि सानों को 2 करोड़ 37 लाख प्रीमियम देना पड़ी। 7 करोड़ 16 लाख केंद्र सरकार ने और 7 करोड़ 16 राज्य सरकार ने प्रीमियम दी। दोनों सरकारों ने कुल 14 करोड़ 32 लाख रुपये प्रीमियम दिया।
वर्ष 2019 में खरीफ फसल के लिए बजाज अलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी नामित की गई। इसने 45,661 किसानों का बीमा किया। इसमें 31,647 किसान बैंक कर्जदार थे। गैर कर्जदार किसान मात्र 14,014 रहे। किसानों की प्रीमियम 2 करोड़ 15 लाख ली गई। केंद्र और राज्य सरकारों से 12 करोड़ 77 लाख रुपये बीमा कंपनी ने प्रीमियम लिया। मगर किसी भी किसान को बीमा राशि नहीं मिली।

चित्रकूटधाम मंडल में कुल किसान और बीमित किसान
जनपद किसान बीमित प्रतिशत
बांदा 339645 145768 43
चित्रकूट 187386 130630 70
महोबा 159369 109111 68
हमीरपुर 894121 - -
योग 15,80,531 3,85,509 66 (औसत)
बांदा। बुंदेलखंड के वरिष्ठ प्रगतिशील किसान और कृषक समृद्धि आयोग सदस्य प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) का कहना है कि केंद्रीय कैबिनेट द्वारा फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने का फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि बीमा कोई उपकार नहीं है। यह व्यवसाय है। सरकार को चाहिए कि बीमा कंपनी के बजाए किसानों के पक्ष में खड़ी हो। आपदा आने पर बीमा कंपनी सरकार को ढाल बनाकर अपना फायदा कर लेती है। कंपनी का स्थानीय स्तर पर कोई कार्यालय नहीं है जहां किसान अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। गांव स्तर पर कभी सर्वे नहीं होता।
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