डीएम ने लगाई शिक्षकों को फटकार: रात में जल्द नींद आती है, ये तक नहीं लिख पाए कक्षा पांच के छात्र
जिले की शिक्षा व्यवस्था की पोल तब खुल गई, जब जिलाधिकारी ने एक सरकारी स्कूल में कक्षा 5 के बच्चों से कुछ सवाल पूछ लिए। बता दें कि बच्चे प्रदेश के सीएम, देश के राष्ट्रपति तक का नाम भी नहीं बता पाए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांदा जिले में बदहाल शिक्षा व्यवस्था का हाल जानने के लिए डीएम अनुराग पटेल ने मंगलवार को नरैनी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय तुर्रा द्वितीय का औचक निरीक्षण किया। डीएम कक्षा पांच के बच्चों से कहा कि जल्द नींद आती है, लिखो तो बच्चे नहीं लिख पाए। इस पर डीएम ने शिक्षकों को फटकार लगाई और बच्चों को एक घंटे तक पढ़ाया।
उन्होंने कहा कि एक महीने बाद फिर आऊंगा और बच्चों की प्रगति देखूंगा। कक्षा-5 के छात्र शिवशंकर, काजल, अनीता, प्रिया एवं गीता से पहाड़ा सुना। इसके साथ ही डीएम ने बच्चों से प्रदेश के मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति आदि का नाम पूछा तो कोई बच्चा नहीं बता सका। डीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए एक माह के अंदर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के निर्देश दिए। वहीं, स्कूल में राजरानी शिक्षा मित्र अनुपस्थित पाई गई। शिक्षा मित्र का मानदेय रोक कर नोटिस जारी किया गया है।
प्रभारी चिकित्साधिकारी समेत सात को नोटिस, वेतन रोका
डीएम ने पीएचसी महुआ का भी औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. देव तिवारी, महिला हेल्थ सुपरवाइजर शशिकला, स्टाफ नर्स पुष्पा सचान, प्रवीण कुमार कश्यप, प्रवीण कुमार, सुरेंद्र पाल सिंह नदारद रहे। डीएम के निर्देश पर प्रभारी चिकित्साधिकारी समेत सभी सात कर्मचारियों को नोटिस भेजकर जवाब मांग गया है।
वहीं, सभी का एक दिन का वेतन रोका गया। डीएम को चिकित्साधिकारी कक्ष, वैक्सीनेशन कक्ष, डॉटस सेंटर, प्रसव केंद्र, महिला वार्ड, लेबर रूम, शौचालय आदि में जगह जगह गंदगी और कूड़े के ढेर लगे मिले। इसके बाद डीएम ने कोल्ड चेन कक्ष का निरीक्षण किया। यहां पर लापरवाही बरतने पर नीतेश गुप्ता, हेल्थ वर्कर का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया। औषधि कक्ष में दवा का मिलान नहीं होने पर फार्मासिस्ट सुशील कुमार तिवारी से स्पष्टीकरण मांगा और एक दिन का वेतन रोका गया।