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ठंड में बेबस यात्री: बसों में खिड़कियों के शीशे गायब, सीटें भी टूटी 15-53-18

Mon, 19 Dec 2022 11:52 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 19 Dec 2022 11:52 PM IST
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Banda: Helpless passengers in the cold: windows missing in buses, seats also broken
फोटो-19 बीएनडीपी-01 - फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल की खटारा रोडवेज बसों की टूटे शीशे सर्दी में सफर के दौरान यात्रियों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। दिन में तो अधिक परेशानी नहीं होती है, लेकिन रात में इन बसों में सफर मुश्किल भरा हो रहा है।
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परिवहन निगम के चित्रकूटधाम मंडल में 399 रोडवेज बसों का बेड़ा है। इनमें से 60 फीसदी बसों की हालत खस्ता होने से यात्री ठंड में ठिठुर रहे हैं। 10 लाख किलो मीटर और 11 साल का मानक पूरा कर चुकी ज्यादातर बसें खटारा हैं। किसी बस में खिड़की में शीशे नहीं तो किसी में पीछे की एक दो सीट ही गायब हैं। बस की बॉडी चारों तरफ से खुली है। रस्सी व लोहे के तार बांधकर काम चलाया जा रहा है।
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24 से अधिक बसें खराब स्थिति में वर्कशाप में खड़ी हैं। फतेहपुर, चिल्ला, नरैनी आदि मार्गों में बसों का आभाव है। बसों की से यात्रियों को कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह-शाम होती है। पिछले दिनों एमडी ने बसों की सीटों व शीशों को ठीक करने के लिए निर्देश दिए थे। लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। रविवार को रोडवेज बस अड्डा में पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई।
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फॉग लाइट और वाइपर नहीं
रोडवेज की 75 फीसद बसों में ऑलवेदर/फॉग लाइट व वाइपर नहीं हैं। फॉग लाइट हर प्रकार के वातावरण में काम करती है। कोहरे की धुंध में भी चालक को दूर की गतिविधिया नजर आ जाती हैं। कोहरा अधिक होने पर चालक वाइपर से शीशे को साफ करता है। इसके न होने से चालक को बार-बार बस रोककर शीशे को साफ करना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
ज्यादातर बसों में सीटें टूटी
बस स्टैंड में खड़ी बांदा डिपो की बांदा-कालिंजर बस की हालत इतनी जर्जर थी कि ड्राइवर ने आगे व पीछे की बाड़ी व बस के पीछे की दो सीटों को लोहे
के तार से बांध रखा था। यही स्थिति फतेहपुर डिपो की बस की थी। जो बांदा से फतेहपुर जा रही थी। बस के ज्यादातर एक-एक शीेशे गायब थे। दरवाजा भी नहीं था। गेट से हवा आ रही थी।
स्वराज कालोनी निवासी क्षत्रपाल सिंह का कहना है कई बसों में शीशे ही नहीं हैं। ऐसे में ठंडी-ठंडी हवा सीधे कानों में प्रवेश करती है। सीटें के
ऊपर की रैक्सीन फट गई है। ब्रेकर व गड्ढो में हालत बिगड़ जाती है। पैसा देने के बाद भी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
गंछा के द्वारिका यादव का कहना है कि ज्यादातर बसों में वाइपर नहीं हैं। कोहरे में चालक 100 मीटर चलने के बाद बस रोककर शीशे को साफ करता है। बसों की बॉडी के पेंच खुल गए हैं। पूरी बॉडी शोर मचाती चलती है। पिछले दिनों बीच सफर में कालिंजर मार्ग पर बस के पीछे का हिस्सा लटक गया था।

रोडवेज के बेडे़ में जल्द अच्छी स्थिति की निजी बसें शामिल की जाएंगी। 27 मार्गों के लिए 42 निजी बसों की स्वीकृति मिल गई है। निजी बसों के आने के बाद मानक पूरा कर चुकी बसों को कडंम घोषित कर बेड़े से हटा दिया जाएगा। -संदीप कुमार अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।

फोटो-19 बीएनडीपी-02

फोटो-19 बीएनडीपी-02- फोटो : BANDA

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