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Banda News: बांदा को बजट नहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना के पेच ने अटकाई नहरों की सफाई
Fri, 05 Dec 2025 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 05 Dec 2025 12:21 AM IST
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फोटो- 08 नरैनी के निकट केन कैनाल से निकली नहर को जांचती टीम। संवाद
बांदा। नहरों की सफाई का काम केन-बेतवा लिंक परियोजना के पेच में फंस गया है। चित्रकूटधाम मंडल के तीन जनपदों को नहरों की सिल्ट सफाई का बजट बांदा को नहीं मिला। उधर, जनपद हमीरपुर, महोबा व चित्रकूट में सिंचाई विभाग ने नहरों की साफ-सफाई 191 लाख बहा दिए गए लेकिन टेल तक पानी नहीं पहुंचा। रजबहा व नहरों की सिल्ट व झाड़ियों की साफ-सफाई न होने से लाखों लीटर पानी बेवजह बर्बाद हो रहा है। चित्रकूटधाम मंडल में 1700 किमी में नहरों का जाल बिछा है। प्रति वर्ष करीब सात करोड़ रुपये से अधिक रजबहाें और नहरों की सिल्ट की सफाई में खर्च होते हैं। इस बार मंडल के तीन जनपद महोबा, चित्रकूट व हमीरपुर को तो नहरों की सफाई का बजट मिला लेकिन बांदा को नहीं दिया गया।
ऐसे में बांदा जनपद की करीब 700 किमी नहरों में सिल्ट जमा है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसान खासा परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रजबहा व नहरों में सिल्ट सफाई पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा है। रबी में किसानों को गेहूं के पलेवा के लिए पानी की जरूरत है लेकिन जगह-जगह नहरें टूटी पड़ी हैं। सिल्ट नहर के ऊपर तक जमी हुई ऐसे में पानी कुछ ही दूरी पर बर्बाद हो जाएगा। कमोबेश यहीं स्थिति अन्य जनपदों की भी है जहां कागजों पर नहरों की साफ-सफाई करवा दी गई है। हकीकत में नहरों में सिल्ट ज्यों का त्यों जमा है। पानी नहरों के अंतिम छोर तक तो दूर कुछ ही किमी में नहरों के उफना जाने से बर्बाद हो जाता है।
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चार्ट
मंडल में इस वर्ष नहरों की सफाई में खर्च (लाख में)
जनपद किलोमीटर खर्च
चित्रकूट 340 65
महोबा 494 85
हमीरपुर 132 41
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योग- 966 191
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इनसेट-
केन-बेतवा लिंक परियोजना
केन-बेतवा लिंक परियोजना की वर्ष 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी ने आधारशिला रखी थी। परियोजना में बुंदेलखंड की दो बड़ी नदी केन और बेतवा को आपस में जोड़कर बारिश के पानी को बर्बाद होने रोका जाना है। मध्य प्रदेश में दोधन बांध बन रहा है। इस बांध से दोनों नदियों को जोड़ने के लिए 220 किमी लंबी नहर बनाई जाएगी। नहर के जरिए यूपी और एमपी के करीब नौ लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। 41 लाख लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। बांदा और बुंदेलखंड के 13 जनपद लाभान्वित होंगे। झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा व बांदा जनपद के 21 लाख लोगों को 67 मिलियन क्यूबिक मीटर पीने का पानी मिलेगा। साथ ही 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की व्यवस्था बेहतर होगी।
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इनसेट-
भाजपा विधायक ने भी जताई थी चिंता
सत्तारूढ़ भाजपा के शिक्षक विधायक (विधान परिषद) ने पिछले साल मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था कि जिले की नहरों की दुर्दशा की शिकायत की थी। उन्होंने अपने ही नरैनी तहसील के पैतृक गांव जरर का जिक्र करते हुए कहा था कि यहां 60 वर्षो में एक भी बार नहर में पानी नहीं आया। कहा था कि सिंचाई विभाग यदि सिंचाई के लिए पानी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है तो वह केन नदी में पंप कैनाल योजना बनाकर गांव के बड़े तालाब में पानी उपलब्ध कराए।
-- -- -- वर्जन
इस वर्ष जनपद बांदा को नहरों की सिल्ट सफाई का बजट नहीं मिला है। शासन से कई बार मांग की गई। इसकी मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि केन-बेतवा गठजोड़ पर काम शुरू होने वाला है और नहरों को नए सिरे से सृजन किया जाएगा।
उस्मान, अधीक्षण अभियंता, बांदा
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ऐसे में बांदा जनपद की करीब 700 किमी नहरों में सिल्ट जमा है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसान खासा परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रजबहा व नहरों में सिल्ट सफाई पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा है। रबी में किसानों को गेहूं के पलेवा के लिए पानी की जरूरत है लेकिन जगह-जगह नहरें टूटी पड़ी हैं। सिल्ट नहर के ऊपर तक जमी हुई ऐसे में पानी कुछ ही दूरी पर बर्बाद हो जाएगा। कमोबेश यहीं स्थिति अन्य जनपदों की भी है जहां कागजों पर नहरों की साफ-सफाई करवा दी गई है। हकीकत में नहरों में सिल्ट ज्यों का त्यों जमा है। पानी नहरों के अंतिम छोर तक तो दूर कुछ ही किमी में नहरों के उफना जाने से बर्बाद हो जाता है।
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मंडल में इस वर्ष नहरों की सफाई में खर्च (लाख में)
जनपद किलोमीटर खर्च
चित्रकूट 340 65
महोबा 494 85
हमीरपुर 132 41
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योग- 966 191
इनसेट-
केन-बेतवा लिंक परियोजना
केन-बेतवा लिंक परियोजना की वर्ष 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी ने आधारशिला रखी थी। परियोजना में बुंदेलखंड की दो बड़ी नदी केन और बेतवा को आपस में जोड़कर बारिश के पानी को बर्बाद होने रोका जाना है। मध्य प्रदेश में दोधन बांध बन रहा है। इस बांध से दोनों नदियों को जोड़ने के लिए 220 किमी लंबी नहर बनाई जाएगी। नहर के जरिए यूपी और एमपी के करीब नौ लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। 41 लाख लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। बांदा और बुंदेलखंड के 13 जनपद लाभान्वित होंगे। झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा व बांदा जनपद के 21 लाख लोगों को 67 मिलियन क्यूबिक मीटर पीने का पानी मिलेगा। साथ ही 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की व्यवस्था बेहतर होगी।
इनसेट-
भाजपा विधायक ने भी जताई थी चिंता
सत्तारूढ़ भाजपा के शिक्षक विधायक (विधान परिषद) ने पिछले साल मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था कि जिले की नहरों की दुर्दशा की शिकायत की थी। उन्होंने अपने ही नरैनी तहसील के पैतृक गांव जरर का जिक्र करते हुए कहा था कि यहां 60 वर्षो में एक भी बार नहर में पानी नहीं आया। कहा था कि सिंचाई विभाग यदि सिंचाई के लिए पानी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है तो वह केन नदी में पंप कैनाल योजना बनाकर गांव के बड़े तालाब में पानी उपलब्ध कराए।
इस वर्ष जनपद बांदा को नहरों की सिल्ट सफाई का बजट नहीं मिला है। शासन से कई बार मांग की गई। इसकी मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि केन-बेतवा गठजोड़ पर काम शुरू होने वाला है और नहरों को नए सिरे से सृजन किया जाएगा।
उस्मान, अधीक्षण अभियंता, बांदा