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समितियों में डीएपी खत्म, किसान परेशान
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मंडी समिति में खाद के लिए लाइन में खड़े किसान।
- फोटो : BANDA
बांदा। सहकारी समितियों में डीएपी खत्म हो गई है। किसान गेहूं की बुआई में जुटे हैं, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसान खाद के लिए परेशान हैं। किसानों का कहना है कि जल्द खाद न मिली तो खेतों की नमी उड़ जाएगी।
शनिवार को डीसीडीएफ उर्वरक क्रय केंद्र में डीएपी न होने से किसान बैरंग लौट रहे थे। हटेटी पुरवा के किसान रामसजीवन ने बताया कि डीएपी खत्म हो गई है। केंद्र प्रभारी डीएपी आने का भरोसा भी नहीं दे रहे हैं। यूरिया का वितरण किया जा रहा है। मंडी समिति स्थित उर्वरक केंद्र में यूरिया का वितरण हो रहा था। केंद्र प्रभारी का कहना था कि डीएपी की मांग की गई है, लेकिन बफर गोदाम में डीएपी खत्म है। बांटने के लिए यूरिया दी जा रही है।
बताया कि बाजार में महंगी और नकली खाद मिल रही है। इसेडालने का कोई मतलब नहीं है। महुआ के किसान तिजोला प्रसाद विश्वकर्मा का कहना था कि सहकारी समिति में दो दिन से डीएपी नहीं है। डीएपी के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं।
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ज्यादातर सहकारी समितियों में डीएपी नहीं है। जल्द खाद न मिली तो खेतों की नमी सूख जाएगी। दोबारा पलेवा करने में प्रति हेक्टेयर दो हजार रुपये का खर्च बढ़ जाएगा। उप कृषि निदेशक विजय कुमार का कहना है कि डीएपी की दो जंबों रैक मंगाई गई हैं। एक दो दिन में वह आ जाएंगी।
डीएपी की किल्लत खत्म हो जाएगी। 70 फीसदी खेतों में बुआई हो चुकी है। अक्तूबर में लक्ष्य से अधिक खाद का वितरण किया गया है। इससे खाद की कमी हो गई।
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शनिवार को डीसीडीएफ उर्वरक क्रय केंद्र में डीएपी न होने से किसान बैरंग लौट रहे थे। हटेटी पुरवा के किसान रामसजीवन ने बताया कि डीएपी खत्म हो गई है। केंद्र प्रभारी डीएपी आने का भरोसा भी नहीं दे रहे हैं। यूरिया का वितरण किया जा रहा है। मंडी समिति स्थित उर्वरक केंद्र में यूरिया का वितरण हो रहा था। केंद्र प्रभारी का कहना था कि डीएपी की मांग की गई है, लेकिन बफर गोदाम में डीएपी खत्म है। बांटने के लिए यूरिया दी जा रही है।
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बताया कि बाजार में महंगी और नकली खाद मिल रही है। इसेडालने का कोई मतलब नहीं है। महुआ के किसान तिजोला प्रसाद विश्वकर्मा का कहना था कि सहकारी समिति में दो दिन से डीएपी नहीं है। डीएपी के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं।
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ज्यादातर सहकारी समितियों में डीएपी नहीं है। जल्द खाद न मिली तो खेतों की नमी सूख जाएगी। दोबारा पलेवा करने में प्रति हेक्टेयर दो हजार रुपये का खर्च बढ़ जाएगा। उप कृषि निदेशक विजय कुमार का कहना है कि डीएपी की दो जंबों रैक मंगाई गई हैं। एक दो दिन में वह आ जाएंगी।
डीएपी की किल्लत खत्म हो जाएगी। 70 फीसदी खेतों में बुआई हो चुकी है। अक्तूबर में लक्ष्य से अधिक खाद का वितरण किया गया है। इससे खाद की कमी हो गई।