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बारिश की दरियादिली से पिछड़ी बुवाई

Sun, 03 Nov 2019 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2019 11:36 PM IST
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Backward sowing due to rain generously
रबी के लिए खेत की जुताई करता किसान। - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड में मौसम के मिजाज भी निराले हैं। बारिश न हो तो फसल सूखे। ज्यादा हो जाए तो बुवाई पिछड़े। मौजूदा रबी की फसल में कुछ ऐसा ही हुआ है। मानसूनी मौसम के अंतिम दिनों में जमकर हुई बारिश ने चित्रकूटधाम मंडल में रबी की बुवाई में ब्रेक लगा दिया।
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पानी से लबालब तमाम खेत बुवाई के लिए तैयार नहीं हो पाए। चारों जिलों में इनका रकबा लगभग 2.40 लाख हेक्टेयर बताया गया है। जानकार किसानों का कहना है कि देरी से बुवाई का खामियाजा किसानों को उत्पादन में गिरावट के रूप में भुगतना पड़ेगा। फसल 10 से 15 फीसदी कम हो सकती है।
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चित्रकूटधाम मंडल में इस रबी के लिए कृषि विभाग ने 9.52 लाख हेक्टेयर बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया था। सितंबर के अंत तक बारिश का सिलसिला नहीं थमा। ऐसे में अधिकांश इलाकों में और खासकर एक फसली वाले क्षेत्रों में अक्तूबर तक बुवाई नहीं हो सकी। हालांकि 7.12 लाख हेक्टेअर में बुआई हो जाना बताई गई है। नवंबर की शुरुआत भी बादल और बूंदाबांदी से हुई है। पूरी तरह खुला मौसम और धूप न होने से तमाम खेत बुवाई के लिए तैयार नहीं हो पाए।
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अक्तूबर में हो जानी थी दलहन-तिलहन की बुवाई
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के उप कृषि निदेशक एके सिंह का कहना है कि अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक दलहन व तिलहन और नवंबर में पहले हफ्ते तक गेहूं की बुआई हो जाना चाहिए, लेकिन बारिश देर तक होने से कई क्षेत्रों में दलहन व तिलहन गेहूं की बुआई पिछड़ गई है। उन्होंने कहा कि देर से बुआई का गेहूं पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन दलहन-तिलहन का उत्पादन घट जाएगा।
दिवाली के पूर्व बुवाई से फसलों में नहीं लगता रोग
बांदा। उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग के सदस्य और मंडल के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) का कहना है कि अक्तूबर के बाद बुवाई से फसल में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आ सकती है। दाना भी कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि चित्रा नक्षत्र में चना और स्वाती में गेहूं की बुवाई अच्छी रहती है। अब अलसी की बुवाई का भी उचित समय नहीं बचा। यह भी बताया कि दीपावली के पहले बुवाई से कई फायदे हैं। कठिया गेहूं में रंगा रोग नहीं लगता। दिवाली के पहले बोई गई चना और सरसों में भी रोग नहीं लगते। उन्होंने कहा कि चित्रकूटधाम मंडल में एक फसली इलाके काफी हैं। बारिश देर तक होने से यहां बुवाई पिछड़ी है।
चारों जिलों में बाकी है बुवाई
बांदा। कृषि विभाग के अनुसार चारों जिलों में अभी भी 2.40 लाख हेक्टेयर में बुवाई नहीं हो पाई है। बांदा में 3.02 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 2.02 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। हमीरपुर में 2.52 लाख हेक्टेयर में 1.95 लाख, महोबा में 2.62 लाख हेक्टेयर में 2.10 लाख व चित्रकूट में 1.35 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 1.04 लाख हेक्टेयर में रबी की बुआई हुई है। संवाद

औसत से 18 मिलीमीटर ज्यादा हुई बारिश
बांदा। इस वर्ष जून से सितंबर माह तक मंडल में 826.82 मिलीमीटर औसत बारिश हुई है। यह यहां के सामान्य औसत 809.65 मिलीमीटर से 18 मिमी ज्यादा है। स्थानीय मौसम विभाग व राजस्व विभाग के अनुसार इस अवधि में हमीरपुर में 974 मिमी (126 प्रतिशत), महोबा में 509.07 मिमी (66 प्रतिशत), बांदा में 928.73 मिमी (109 प्रतिशत) और चित्रकूट में 895.50 मिमी (105 प्रतिशत) बारिश हुई है।
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