{"_id":"6207eea1a8a9b97a6e1a9afb","slug":"ayushman-could-not-be-planned-even-in-three-and-a-half-years-banda-news-knp6802727178","type":"story","status":"publish","title_hn":"साढ़े तीन साल में भी ‘आयुष्मान’ नहीं हो सकी योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साढ़े तीन साल में भी ‘आयुष्मान’ नहीं हो सकी योजना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। आयुष्मान भारत योजना करीब साढ़े तीन साल बाद भी चित्रकूटधाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पाई। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज वाली यह योजना गरीबों को ‘आयुष्मान’ करने में बेहद पिछड़ी है। हालांकि कमजोर प्रगति के पीछे स्वास्थ्य विभाग कोरोना काल की दलील दे रहा है।
आयुष्मान योजना प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार है। इसकी शुरूआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के लोगों को मुुफ्त इलाज की व्यवस्था है। योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके गोल्डेन कार्ड होंगे। लेकिन गोल्डन कार्ड जारी होने की प्रगति बेहद कमजोर है।
चारों जिलों में कुल 18 लाख 48 हजार पात्रों में अब तक 5 लाख 24 हजार लोगों के ही गोल्डन कार्ड बन सके हैं। यह मात्र 28.35 फीसदी है। सबसे कम गोल्डन कार्ड बांदा जनपद में जारी हुए हैं। यहां मात्र 24.38 फीसदी लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा चित्रकूट में 26.48 प्रतिशत, हमीरपुर में 31.82 और महोबा में 34.39 प्रतिशत पात्रों के गोल्डन कार्ड जारी हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना काल की वजह से प्रगति कमजोर रही। बड़ी संख्या में लोगों के बाहर होने से भी समस्या आड़े आई।
अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कोरोना काल की वजह से गोल्डन कार्ड जारी होने में दिक्कत आई। स्वास्थ्य विभाग कर्मी कोविड ड्यूटी में लगे रहे। यही कारण है कि गोल्डन कार्ड की प्रगति में वृद्धि नहीं हो सकी। जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी में लगातार गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
लाभार्थियों और गोल्डन कार्ड धारकों की संख्या
जनपद पात्र गोल्डन कार्ड प्रतिशत
--------------------------------------------
बांदा 6,92,905 1,68,908 24.38
चित्रकूट 3,94,615 1,04,488 26.48
हमीरपुर 4,31,710 1,37,365 31.82
महोबा 3,29,370 1,13,268 34.39
---------------------------------------------
योग- 18,48,600 5,24,029 28.35 (औसत)
-----------------------------------------
4607 मरीजों के इलाज का अटका भुगतान
बांदा। योजना लागू होने के बाद मंडल के चारों जिलों में अब तक 16,243 लाभार्थियों का इलाज हुआ। इनमें 4607 मरीजों के इलाज का भुगतान अटका है। अब तक 11,636 लाभार्थियों (71.64 प्रतिशत) के इलाज का भुगतान विभिन्न अस्पतालों को किया गया है। बांदा में 5600 लाभार्थियों में 3963, चित्रकूट में 3385 में से 2720, हमीरपुर में 3364 में 2225 और महोबा में 3894 लाभार्थियों में 2728 मरीजों के इलाज का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है।
योजना से नहीं जुड़ रहे प्राइवेट अस्पताल
बांदा। प्राइवेट अस्पताल संचालक योजना से जुड़ने में दिलचस्पी नहीं ले रहे। मंडल में योजना में कुल 41 अस्पताल शामिल हैं। मंडल में अधिकांश 33 सरकारी अस्पताल योजना में शामिल हैं। मात्र आठ प्राइवेट अस्पताल जुड़े हैं। इनमें बांदा में पांच और हमीरपुर में तीन प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज कर रहे हैं। चित्रकूट और महोबा में कोई प्राइवेट अस्पताल योजना में नहीं जुड़ा है।
विज्ञापन
आयुष्मान योजना प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार है। इसकी शुरूआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के लोगों को मुुफ्त इलाज की व्यवस्था है। योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके गोल्डेन कार्ड होंगे। लेकिन गोल्डन कार्ड जारी होने की प्रगति बेहद कमजोर है।
विज्ञापन
चारों जिलों में कुल 18 लाख 48 हजार पात्रों में अब तक 5 लाख 24 हजार लोगों के ही गोल्डन कार्ड बन सके हैं। यह मात्र 28.35 फीसदी है। सबसे कम गोल्डन कार्ड बांदा जनपद में जारी हुए हैं। यहां मात्र 24.38 फीसदी लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा चित्रकूट में 26.48 प्रतिशत, हमीरपुर में 31.82 और महोबा में 34.39 प्रतिशत पात्रों के गोल्डन कार्ड जारी हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना काल की वजह से प्रगति कमजोर रही। बड़ी संख्या में लोगों के बाहर होने से भी समस्या आड़े आई।
अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कोरोना काल की वजह से गोल्डन कार्ड जारी होने में दिक्कत आई। स्वास्थ्य विभाग कर्मी कोविड ड्यूटी में लगे रहे। यही कारण है कि गोल्डन कार्ड की प्रगति में वृद्धि नहीं हो सकी। जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी में लगातार गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
लाभार्थियों और गोल्डन कार्ड धारकों की संख्या
जनपद पात्र गोल्डन कार्ड प्रतिशत
--------------------------------------------
बांदा 6,92,905 1,68,908 24.38
चित्रकूट 3,94,615 1,04,488 26.48
हमीरपुर 4,31,710 1,37,365 31.82
महोबा 3,29,370 1,13,268 34.39
---------------------------------------------
योग- 18,48,600 5,24,029 28.35 (औसत)
-----------------------------------------
4607 मरीजों के इलाज का अटका भुगतान
बांदा। योजना लागू होने के बाद मंडल के चारों जिलों में अब तक 16,243 लाभार्थियों का इलाज हुआ। इनमें 4607 मरीजों के इलाज का भुगतान अटका है। अब तक 11,636 लाभार्थियों (71.64 प्रतिशत) के इलाज का भुगतान विभिन्न अस्पतालों को किया गया है। बांदा में 5600 लाभार्थियों में 3963, चित्रकूट में 3385 में से 2720, हमीरपुर में 3364 में 2225 और महोबा में 3894 लाभार्थियों में 2728 मरीजों के इलाज का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है।
योजना से नहीं जुड़ रहे प्राइवेट अस्पताल
बांदा। प्राइवेट अस्पताल संचालक योजना से जुड़ने में दिलचस्पी नहीं ले रहे। मंडल में योजना में कुल 41 अस्पताल शामिल हैं। मंडल में अधिकांश 33 सरकारी अस्पताल योजना में शामिल हैं। मात्र आठ प्राइवेट अस्पताल जुड़े हैं। इनमें बांदा में पांच और हमीरपुर में तीन प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज कर रहे हैं। चित्रकूट और महोबा में कोई प्राइवेट अस्पताल योजना में नहीं जुड़ा है।