{"_id":"57d1a8604f1c1b7f2f319f9a","slug":"arjan-uniformity-name-of-religion","type":"story","status":"publish","title_hn":"एकरूपता का नाम ही आर्जन धर्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एकरूपता का नाम ही आर्जन धर्म
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:35 PM IST
विज्ञापन
पर्यूषण पर्व पर जैन मंदिर में पाठ करतीं जैन महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन पंडित सजल जैन ‘सिंगोड़ी’ ने ‘आर्जव धर्म’ के बारे में बताया। कहा कि मन, वचन, कर्म की एकरूपता का नाम ही आर्जव धर्म है। इसलिए दुर्गुणों से बचें और आत्म कल्याण की भावना रखें।
विज्ञापन
तारण तरण दिगंबर जैन मंदिर छोटी बाजार में बृहस्पतिवार को प्रवचन में सजल जैन ने कहा कि ‘वस्तु स्वाभावो धम्मो’ अर्थात वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। जैन दर्शन में साधना की दृष्टि से धर्म के 10 अंग कहे गए हैं। क्षमता, मदिव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन, ब्रह्मचर्य। उन्होंने कहा कि जो मन में हो वही वचन से और शरीर से होना चाहिए। यही आर्जव धर्म है।
विज्ञापन
यदि कोई पुरुष या स्त्री ऊपरी तौर पर आपकी प्रशंसा करता है और आपके लिए कुछ भी करने को बात करता है और स्वयं को आपका शुभचिंतक कहता है, लेकिन भीतर ही भीतर आपके बारे में अहित करने की, नुकसान करने की मंशा रखता है तो वह अपना स्वयं का ही नुकसान करता है। वह दुर्गति को प्राप्त होता है।
विज्ञापन
इस दौरान मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मां जिनवाणी की आरती हुई। नवयुवकों व महिलाओं ने चंवर लेकर नृत्य किया। प्रकाश जैन, दिलीप जैन, दिनेश, अुंशल, संजीव, सौरभ, राजेश, रत्नेश, मिलन, संजय, सुनील, मुकेश, राकेश, रोली जैन, नीता, दिव्या, सिना बाई, सुनीता, रश्मि, ज्योति आदि मौजूद रहीं।