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मनमानी जिंदगी जीने का हक नहीं

Sat, 07 Mar 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sat, 07 Mar 2015 11:44 PM IST
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Arbitrary right to life

छनेहरा लालपुर गांव में होली के मौके पर दो दिवसीय इज्तिमा आयोजित हुआ। बड़ी संख्या में शामिल लोगों को कई जिले से आए मुफ्ती और मौलानाओं ने जिंदगी बसर करने के तरीके और इसका मकसद बताया।

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देहात कोतवाली क्षेत्र छनेहरा लालपुर गांव में शुक्रवार को तड़के नमाज के बाद दो दिवसीय इज्तिमा शुरू हुआ। मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद (हथौरा) ने अपने खिताब (संबोधन) में कहा कि दुनिया में इंसान का मनमानी जिंदगी जीने का हक नहीं है।
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शरीयत ने पूरे जीवन में 24 घंटे जीने के तौर तरीके और आदाब बताए हैं। जो इन पर अमल करेगा वह दुनिया और आखिरत दोनों में ही कामयाब होगा। उन्होंने कहा कि हर इंसान से हमदर्दी और उसके साथ नेकी करनी चाहिए। इस्लाम यही सिखाता है।
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मुफ्ती जहीरुल इस्लाम (बाराबंकी) ने कहा कि कारोबार, नौकरी या कोई और जायज पेशा करने से इस्लाम नहीं रोकता। बशर्ते उसमें ईमानदारी और शरीयत के बताए कानून पर अमल हो।


मुफ्ती जकरिया (फतेहपुर) और मौलाना इफ्तेखारुल हसन (बहराइच), मुफ्ती शोएब (आजमगढ़) और मुफ्ती उबैदुल्ला (हथौरा) ने भी दोनों दिन अपनी तकरीरों में लोगों को शरीयत के मुताबिक जिंदगी जीने पर जोर दिया। संचालन शहर काजी मौलाना कमरुद्दीन ने किया। शनिवार को देर शाम दुआ के साथ समापन हुआ।

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