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स्कूल-कोचिंगों में भूकंपरोधी नियमों को ठेंगा

Sat, 28 Dec 2019 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2019 11:21 PM IST
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Anti-earthquake rules in school coaching
देश के कई भागों में आए दिन भूकंप से धरती हिल रही है। बांदा जनपद भी इस कुदरती आपदा से सुरक्षित नहीं है। कभी भी यहां भी भूकंप के झटके आ सकते हैं।
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इसे लेकर सबसे ज्यादा लापरवाही स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में हैं। इनके भवन भूकंपरोधी नहीं हैं। न ही वहां बचाव की कोई व्यवस्थाएं हैं। तमाम स्कूल और कोचिंग प्राचीन जर्जर भवनों में चल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश भूकंप सुरक्षा नियमावली 2005 में सभी भवनों को भूकंपरोधी बनाए जाने का प्रावधान है। जनपद के 80 फीसदी सरकारी व गैर सरकारी स्कूल, कोचिंग 50 साल से अधिक पुराने जर्जर भवनों में चल रहे हैं।
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उच्च न्यायालय व शासन के सख्त आदेशों के बाद भी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों व स्टाफ को भूकंप से बचने के तरीके भी नहीं बताए गए। न ही स्कूलों में भूकंप से बचने के उपायों की वालपेंटिंग कराई गई।
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कोचिंगों का तो आलम और भी खराब है। संकरी गलियों व भवन की तीसरी मजिंल में चल रही कक्षाओं में महज एक ही रास्ता है। अग्निकांड अथवा भूकंप की स्थिति में बाहर भागने के लिए अतिरिक्त द्वार नहीं है।
भूकंप सुरक्षा नियमावली में स्कूलों के संचालन के पूर्व विकास प्राधिकरण, नगर पालिका व अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना होती है, लेकिन जिम्मेदार चंद पैसों के खातिर बिना किसी जांच पड़ताल के एनओसी जारी कर देते हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति अग्निशमन विभाग की है। निर्देश हैं कि अधिकारी विद्यालयों का निरीक्षण कर अग्नि व भूकंप सुरक्षा का जायजा लें। लेकिन कार्यालय में बैठकर ही निरीक्षण रिपोर्ट दे दी जाती है।

पुराने भवनों में भूकंपरोधी व्यवस्थाएं नहीं हैं। नए स्कूल भवनों में भूकंपरोधी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। समय-समय पर शिक्षकों व स्टाफ को भूकंप से बचने के तौर तरीके बताए जाते हैं।
विनोद कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक, बांदा।
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