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फसल और कर्ज ने ली किसान की जान
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:47 PM IST
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बुंदेलखंड
- फोटो : बीबीसी
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बांदा। फसल खराब होने और बैंक व साहूकारों के कर्ज की चिंता में किसान की सदमे से मौत हो गई। शासन से सूखा राहत के नाम पर धेला नहीं मिला। दो कीमती भैंसों ने भी पिछले माह भूख से दम तोड़ दिया था।
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नरैनी तहसील के निवादा गांव निवासी भरत बाबू द्विवेदी (55) ने रविवार को दोपहर परिजनों को सीने में दर्द होने की बात कही। कुछ देर बाद हालत बिगड़ी और बेहोश हो गया। परिजन शहर के एक निजी अस्पताल ला रहे थे, तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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पुत्र दीपक द्विवेदी ने बताया कि पिता के नाम करीब 30 बीघा जमीन है। महुआ स्थित इलाहाबाद बैंक से ढाई लाख का केसीसी कार्ड बनवाया था। फसलों की सिंचाई व बुवाई के लिए एक लाख रुपये कर्ज ले रखा है। 30 बीघे में सिर्फ चार क्विंटल गेहूं निकला।
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साहूकारों से भी एक लाख कर्ज लिया था। दीपक ने बताया कि हलका लेखपाल से पिता ने कई बार राहत राशि देने की मांग की थी। लेकिन उसने नहीं सुनी। आर्थिक तंगी व कर्ज से परेशान रहते थे। इसी सदमे में रविवार को शाम उनकी मौत हो गई।