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शासन के रुख के बाद प्रशासन ने मारी पलटी
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बांदा। अपात्र राशन कार्डधारकों से वसूली (रिकवरी) का हौव्वा खड़ा करके हजारों कार्ड धारकों की नींद उड़ा देने के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। शासन द्वारा राशन कार्ड सरेंडर या वसूली संबंधी बातों को खारिज कर देने के बाद जिला प्रशासन ने भी पलटी मारी है। गलती का ठीकरा लिपिक पर फोड़ा है। कहा कि वसूली की बात लिपिकीय त्रुटि से अंकित हो गई है।
मई की शुरूआत से ही अपात्र अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को अपने कार्ड सरेंडर करने की लगातार सूचनाएं और चेतावनी दी जा रही थी। आपूर्ति विभाग लगातार रट लगाए था कि निर्धारित तिथि के अंदर कार्ड सरेंडर न करने पर अपात्रों से 24 रुपये प्रति किलो गेहूं व चावल और 32 रुपये की दर से चीनी तथा बाजार भाव से तेल, चना, नमक की कीमत वसूली जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आपूर्ति विभाग और प्रशासन के इस आदेश से खलबली मच गई। अपात्रता की जो शर्तें गिनाई गई थीं, उसमें बड़ी संख्या में लोग दायरे में आ गए। नतीजे में आपूर्ति विभाग में राशन कार्ड सरेंडर करने वालों का हुजूम उमड़ने लगा। अब तक 5890 राशन कार्ड आपूर्ति विभाग को सौंपे जा चुके हैं।
खबर छपने के बाद प्रशासन ने रखा अपना पक्ष
उधर, सोमवार को प्रदेश के खाद्य एवं रसद आयुक्त सौरभ बाबू के हवाले से अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित खबर में यह स्पष्ट किया गया कि राशन कार्ड सरेंडर करने का कोई आदेश नहीं है। न ही अपात्रों से वसूली करने का कोई आदेश हुआ है। इसी के बाद सोमवार को जिलाधिकारी ने संशोधित प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें कहा कि 14 मई को जारी विज्ञप्ति में अपात्र अंत्योदय राशन कार्डधारकों को एक सप्ताह के अंदर कार्ड सरेंडर करने वरना अपात्र कार्डधारकों से वसूली की बात लिपिकीय त्रुटिवश अंकित हो गई। विज्ञप्ति में कहा गया है कि वसूली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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मई की शुरूआत से ही अपात्र अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को अपने कार्ड सरेंडर करने की लगातार सूचनाएं और चेतावनी दी जा रही थी। आपूर्ति विभाग लगातार रट लगाए था कि निर्धारित तिथि के अंदर कार्ड सरेंडर न करने पर अपात्रों से 24 रुपये प्रति किलो गेहूं व चावल और 32 रुपये की दर से चीनी तथा बाजार भाव से तेल, चना, नमक की कीमत वसूली जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आपूर्ति विभाग और प्रशासन के इस आदेश से खलबली मच गई। अपात्रता की जो शर्तें गिनाई गई थीं, उसमें बड़ी संख्या में लोग दायरे में आ गए। नतीजे में आपूर्ति विभाग में राशन कार्ड सरेंडर करने वालों का हुजूम उमड़ने लगा। अब तक 5890 राशन कार्ड आपूर्ति विभाग को सौंपे जा चुके हैं।
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खबर छपने के बाद प्रशासन ने रखा अपना पक्ष
उधर, सोमवार को प्रदेश के खाद्य एवं रसद आयुक्त सौरभ बाबू के हवाले से अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित खबर में यह स्पष्ट किया गया कि राशन कार्ड सरेंडर करने का कोई आदेश नहीं है। न ही अपात्रों से वसूली करने का कोई आदेश हुआ है। इसी के बाद सोमवार को जिलाधिकारी ने संशोधित प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें कहा कि 14 मई को जारी विज्ञप्ति में अपात्र अंत्योदय राशन कार्डधारकों को एक सप्ताह के अंदर कार्ड सरेंडर करने वरना अपात्र कार्डधारकों से वसूली की बात लिपिकीय त्रुटिवश अंकित हो गई। विज्ञप्ति में कहा गया है कि वसूली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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