{"_id":"0cfdfe86b432070f3e98c0a209141a7f","slug":"after-taking-bribe-of-rs-15-thousand-allotted-indira-awas-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंदिरा आवास आवंटन में हुई धांधली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंदिरा आवास आवंटन में हुई धांधली
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 07 Jun 2015 11:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंदिरा आवासों के आवंटन में महिला प्रधान और उनके बिचौलियों ने जमकर उगाही की। लाभार्थियों से 15-15 हजार रुपये वसूले। शिकायत पर जिलाधिकारी के आदेश से तीन अफसरों की संयुक्त टीम ने जांच की तो सारा भेद खुल गया। अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। डीएम सुरेश कुमार ने दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
विज्ञापन
मामला अतर्रा ग्रामीण ग्राम पंचायत का है। ग्रामीणों और विद्याधाम समिति सचिव राजाभइया ने 5 जनवरी 2015 को सीएम को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि अतर्रा ग्रामीण ग्राम पंचायत में इंदिरा आवासों में 71 लाभार्थियों से पैसा वसूला गया है। मुख्यमंत्री के सचिव आमोद कुमार ने 16 फरवरी 2015 को इस शिकायत की जांच के आदेश प्रशासन को दिए।
विज्ञापन
डीएम ने एसडीएम अतर्रा, डीपीआरओ और नायब तहसीलदार से जांच करने को कहा। इस बीच ग्राम प्रधान आशा यादव ने अर्जी देकर आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता धमका रहे हैं। उन्होंने कई लाभार्थियों से शपथ पत्र दिलवाए कि उन्होंने आवासों के लिए कोई पैसा नहीं दिया।
विज्ञापन
बाद में डीएम ने तीन अधिकारियों की समिति से जांच कराई। इनमें एसडीएम अतर्रा आरके श्रीवास्तव, जिला पंचायत राज अधिकारी रणधीर सिंह और जिला विकास अधिकारी श्रीकृष्ण त्रिपाठी शामिल रहे। तीनों अधिकारियों ने 22 मई 2015 को डीएम को सौंपी जांच रिपोर्ट में बताया कि महिला प्रधान आशा यादव, उनके पति ब्रज जीवन सिंह यादव, उनका ड्राइवर व एक अन्य रामऔतार वर्मा पर वसूली के लगाए गए आरोप सही प्रतीत होते हैं।
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि 13 और 14 मई को जांच में 38 लाभार्थियों से बयान लिए गए। इसमें 22 लाभार्थियों ने महिला प्रधान को पैसा देने की बात लिखित रूप से स्वीकार की। दो लाभार्थियों ने प्रधान पति को पैसा देने की बात स्वीकारी। एक लाभार्थी ने ड्राइवर को पैसा देने की बात कही।
अलबत्ता 13 लाभार्थियों ने कोई पैसा न देने का बयान दिया। लाभार्थियों से 15-15 हजार रुपये लिए गए हैं। जांच में यह भी कहा गया कि सिर्फ छह लाभार्थियों के आवास पूरे पाए गए। 22 आवास छत स्तर तक, 18 आवास दरवाजे व लेंटर स्तर पर और 14 आवास मात्र नींव स्तर पर निर्मित पाए गए।
8 लाभार्थियों ने आवास निर्माण शुरू ही नहीं कराया। जांच अधिकारियों ने लिखा है कि इससे प्रतीत होता है कि विकास खंड के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया।
जांच अधिकारियों ने लाभार्थियों को उपलब्ध कराई गई धनराशि का दुरुपयोग और अपव्यय किए जाने पर उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है। डीएम सुरेश कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। वह इसका परीक्षण करा रहे हैं। इसके बाद अगली कार्रवाई होगी।