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पांच माह बाद आज से गुलजार होंगे प्राथमिक स्कूल
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बांदा। बेसिक शिक्षा विभाग के तकरीबन 1357 प्राथमिक विद्यालय बुधवार (एक सितंबर) से पांच माह बाद फिर से गुलजार हो जाएंगे। इनमें पढ़ने वाले तकरीबन एक लाख 56 हजार बच्चों की पढ़ाई फिर से कक्षाओं में शुरू होगी। अभी तक ये बच्चे घर में ही पढ़ाई कर रहे थे।
बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि एक दिन पूर्व तैयारी कर लीं गईं हैं। कक्षाओं की साफ-सफाई कराई गई है। हालांकि, एक दिन पूर्व प्राथमिक के ज्यादातर स्कूल ताला बंद मिले। प्रधानाचार्यों का कहना है कि प्रबंध समितियों के माध्यम से अभिभावकों के सहमतिपत्र भी लिए हैं।
आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोविड टास्क फोर्स भी गठित की गईं हैं। जनपद में प्राथमिक (कक्षा एक से पांचवीं तक) तकरीबन एक लाख 56 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। यह सभी शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से अब तक घर से ही ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर रहे थे। अब यह सभी स्कूल में जाकर पढ़ाई कर सकेंगे।
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बच्चों के लिए मिड डे मील की भी व्यवस्था की गई है। रसोइयों को गाइडलाइन जारी कर उन्हें रसोई में भोजन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कोविड गाइडलाइन के अनुसार दो पालियों में शिक्षण कार्य कराया जाएगा।
पहली पाली सुबह 8 बजे से 11 बजे तक और दूसरी पाली साढ़े 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक कक्षाएं (छात्र संख्या) के आधार पर संचालित की जाएंगी। कक्षा में बैठने के लिए छात्र-छात्राओं को कम से कम 6 फीट की दूरी और मास्क लगाना अनिवार्य होगा।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों और प्रबंध समिति के अध्यक्षों को कोविड गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। निगरानी समितियां भी इसकी निगरानी करेंगी।
स्कूल संचालन की ये है गाइडलाइन---
कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों में आगंतुक कक्ष, हाथ सफाई स्थल, पेयजल केंद्र व टायलेट के बाहर वृत्ताकार गोले बनाए जाएंगे। विद्यालय परिसर की प्रतिदिन सफाई कराई जाएगी।
विद्यालय अवधि में सभी शिक्षक और छात्र-छात्राओं को हाथ धोकर तथा सैनिटाइज करके ही विद्यालय में प्रवेश करेंगे। बच्चों को प्रवेश के समय हाथ धुलवाकर सैनिटाइजर कराकर ही कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा।
मिड-डे मील बनाने की ये गाइडलाइन---
बच्चों को भोजन वितरण के समय पंक्तिबद्ध निर्धारित दूरी का पालन करते हुए भोजन परोसा जाएगा। भोजन पकाते समय रसोइया मास्क पहनेंगी। उन्हें किसी भी प्रकार के आभूषण पहनकर आने की अनुमति नहीं होगी।
बर्तनों को दो से तीन बार अच्छी तरह से साफ किया जाएगा। एकत्रित कूड़े को ढक्कनदार डस्टबिन में डाला जाएगा। धोए गए बर्तनों को धूप में सुखाकर रसोईघर में रखा जाएगा।
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बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि एक दिन पूर्व तैयारी कर लीं गईं हैं। कक्षाओं की साफ-सफाई कराई गई है। हालांकि, एक दिन पूर्व प्राथमिक के ज्यादातर स्कूल ताला बंद मिले। प्रधानाचार्यों का कहना है कि प्रबंध समितियों के माध्यम से अभिभावकों के सहमतिपत्र भी लिए हैं।
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आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोविड टास्क फोर्स भी गठित की गईं हैं। जनपद में प्राथमिक (कक्षा एक से पांचवीं तक) तकरीबन एक लाख 56 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। यह सभी शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से अब तक घर से ही ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर रहे थे। अब यह सभी स्कूल में जाकर पढ़ाई कर सकेंगे।
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बच्चों के लिए मिड डे मील की भी व्यवस्था की गई है। रसोइयों को गाइडलाइन जारी कर उन्हें रसोई में भोजन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कोविड गाइडलाइन के अनुसार दो पालियों में शिक्षण कार्य कराया जाएगा।
पहली पाली सुबह 8 बजे से 11 बजे तक और दूसरी पाली साढ़े 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक कक्षाएं (छात्र संख्या) के आधार पर संचालित की जाएंगी। कक्षा में बैठने के लिए छात्र-छात्राओं को कम से कम 6 फीट की दूरी और मास्क लगाना अनिवार्य होगा।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों और प्रबंध समिति के अध्यक्षों को कोविड गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। निगरानी समितियां भी इसकी निगरानी करेंगी।
स्कूल संचालन की ये है गाइडलाइन---
कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों में आगंतुक कक्ष, हाथ सफाई स्थल, पेयजल केंद्र व टायलेट के बाहर वृत्ताकार गोले बनाए जाएंगे। विद्यालय परिसर की प्रतिदिन सफाई कराई जाएगी।
विद्यालय अवधि में सभी शिक्षक और छात्र-छात्राओं को हाथ धोकर तथा सैनिटाइज करके ही विद्यालय में प्रवेश करेंगे। बच्चों को प्रवेश के समय हाथ धुलवाकर सैनिटाइजर कराकर ही कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा।
मिड-डे मील बनाने की ये गाइडलाइन---
बच्चों को भोजन वितरण के समय पंक्तिबद्ध निर्धारित दूरी का पालन करते हुए भोजन परोसा जाएगा। भोजन पकाते समय रसोइया मास्क पहनेंगी। उन्हें किसी भी प्रकार के आभूषण पहनकर आने की अनुमति नहीं होगी।
बर्तनों को दो से तीन बार अच्छी तरह से साफ किया जाएगा। एकत्रित कूड़े को ढक्कनदार डस्टबिन में डाला जाएगा। धोए गए बर्तनों को धूप में सुखाकर रसोईघर में रखा जाएगा।