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आईपीसी में बदलाव के बयान पर भड़के अधिवक्ता
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बांदा। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) को अप्रासंगिक बताकर इसमें अमूलचूल परिवर्तन किए जाने संबंधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए बयान पर अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया है। कहा है कि इस बयान में राजनीतिक सड़ांध नजर आ रही है।
दो दिन पूर्व लखनऊ आए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि आईपीसी व सीआरपीसी में संशोधन का मसौदा तैयार हुआ है। उनके इस बयान पर जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सुबीर सिंह गौर ने कहा कि आईपीसी और सीआरपीसी में बड़ा बदलाव आसान बात नहीं है। अलबत्ता मामूली संशोधन या कुछ नए अध्याय जोड़ना अलग बात है। ऐसा पहले भी हुआ है। अध्यक्ष ने दोनों दंड संहिताओं में बड़े बदलाव की जरूरत से असहमति जताई।
वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता और सपा नेता अशोक दीक्षित ने कहा कि गृह मंत्री का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। मौजूदा कानून को अंग्रेजों का नहीं कहा जा सकता। हमारे देश की आईपीसी और सीआरपीसी पवित्र, परिपक्व और प्रासंगिक है। इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
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उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का यह बयान संवैधानिक व्यवस्था का मखौल उड़ाने वाला है। वरिष्ठ अधिवक्ता सैय्यद मंजर अली ने कहा कि न तजुर्बेकार लोग मुश्किल काम में हाथ डालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा आईपीसी अच्छा कानून है। यह न सिर्फ भारत बल्कि आधे एशिया में चलता है। इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है। यह पर्याप्त है।
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दो दिन पूर्व लखनऊ आए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि आईपीसी व सीआरपीसी में संशोधन का मसौदा तैयार हुआ है। उनके इस बयान पर जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सुबीर सिंह गौर ने कहा कि आईपीसी और सीआरपीसी में बड़ा बदलाव आसान बात नहीं है। अलबत्ता मामूली संशोधन या कुछ नए अध्याय जोड़ना अलग बात है। ऐसा पहले भी हुआ है। अध्यक्ष ने दोनों दंड संहिताओं में बड़े बदलाव की जरूरत से असहमति जताई।
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वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता और सपा नेता अशोक दीक्षित ने कहा कि गृह मंत्री का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। मौजूदा कानून को अंग्रेजों का नहीं कहा जा सकता। हमारे देश की आईपीसी और सीआरपीसी पवित्र, परिपक्व और प्रासंगिक है। इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
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उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का यह बयान संवैधानिक व्यवस्था का मखौल उड़ाने वाला है। वरिष्ठ अधिवक्ता सैय्यद मंजर अली ने कहा कि न तजुर्बेकार लोग मुश्किल काम में हाथ डालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा आईपीसी अच्छा कानून है। यह न सिर्फ भारत बल्कि आधे एशिया में चलता है। इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है। यह पर्याप्त है।