{"_id":"5e5aab988ebc3ef3d328b753","slug":"advice-to-learn-from-krishna-sudama-friendship-banda-news-knp5477739187","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृष्ण-सुदामा मित्रता से सीख लेने की सलाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृष्ण-सुदामा मित्रता से सीख लेने की सलाह
विज्ञापन
अतर्रा में श्रीमद्भागवत कथा में सजाई गई राधा-कृष्ण झांकी।
- फोटो : BANDA
अतर्रा। स्टेशन रोड स्थित गेस्ट हाउस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा शनिवार को समाप्त हो गई। अंतिम दिन पंडित दीपक कृष्ण महाराज ने कृष्ण-राधा का मनुहारी वर्णन किया। कहा कि आज के मनुष्यों को कृष्ण-सुदामा मित्रता से सीख लेकर आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने सिंहासन पर सुदामा को बैठाकर उनके पांव पखारे। कहा कि जहां सत्य होता है वहीं भगवान का जन्म होता है। परमात्मा जिज्ञासा का विषय है परीक्षा का नहीं। कथावाचक ने यहां कथा के दौरान श्रद्धालुओं के अपार स्नेह मिलने पर खुशी जताई।
परीक्षित माधुरी दीक्षित व विद्याभूषण दीक्षित और यजमान अनंत दीक्षित ने सभी का आभार जताया। कथा के दौरान राधा-कृष्ण की झांकी आकर्षक रही। कथा का आयोजन ओम देवी एवं रामकामता दीक्षित की पुण्य स्मृति में किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने सिंहासन पर सुदामा को बैठाकर उनके पांव पखारे। कहा कि जहां सत्य होता है वहीं भगवान का जन्म होता है। परमात्मा जिज्ञासा का विषय है परीक्षा का नहीं। कथावाचक ने यहां कथा के दौरान श्रद्धालुओं के अपार स्नेह मिलने पर खुशी जताई।
विज्ञापन
परीक्षित माधुरी दीक्षित व विद्याभूषण दीक्षित और यजमान अनंत दीक्षित ने सभी का आभार जताया। कथा के दौरान राधा-कृष्ण की झांकी आकर्षक रही। कथा का आयोजन ओम देवी एवं रामकामता दीक्षित की पुण्य स्मृति में किया गया था।
विज्ञापन