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तीन हजार ट्यूबवेल लगाने की घोषणा से ‘हैरत’
Banda
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। बुंदेलखंड में तीन हजार नए ट्यूबवेल लगाने की प्रदेश सरकार की घोषणा पर हैरानी जताई जा रही है क्योंकि कई वर्षों से ट्यूबवेल के लिए दस हजार से ज्यादा किसानों के बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन लंबित पड़े हैं। चित्रकूटधाम मंडल में ही साढ़े छह हजार से ज्यादा आवेदन डंप हैं। इनमें बांदा के ही तीन हजार आवेदन हैं।
गौरतलब है कि भूगर्भ जल वैज्ञानिकों ने बुंदेलखंड में अंधाधुंध भूजल दोहन से धरती फटने जैसे खतरों की चेतावनी दे रखी है। गत वर्षों में कई जगह ऐसी घटनाएं हुईं हैं। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि जलस्तर भी साल-दर-साल तेजी से नीचे खिसक रहा है। जो ट्यूबवेल लगे हैं वही बंद होते जा रहे हैं। ऐसे में नए ट्यूबवेल कितने कारगर होंगे यह पहेली है। दरअसल हाल ही में प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि बुंदेलखंड में 3000 नए नलकूप लगाए जाएंगे।
यहां पर उल्लेखनीय है कि बड़ी संख्या में बुंदेलखंड में किसानों ने निजी नलकूप के लिए आवेदन कर रखे हैं और उन्हें ही इसकी स्वीकृति नहीं मिल रही। सबसे बड़ा अड़ंगा बिजली कनेक्शन का है। सिर्फ चित्रकूटधाम मंडल के चार जिलों में ही 6582 आवेदन पिछले करीब चार वर्षाें से लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा 3000 आवेदन पत्र बांदा जनपद में हैं। चित्रकूट में 2350, हमीरपुर में 1136 और महोबा में 96 आवेदन पत्र फाइलों में दबे पडे़ हैं। इस बाबत पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियंता एसएन वाजपेयी बोले कि ट्यूबवेलों को कनेक्शन देने के लिए हर वर्ष सरकार लक्ष्य निर्धारित करती है। आवेदनपत्रों की संख्या में यह काफी कम होता है। इसी से आवेदन पत्रों की सूची बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि नए ट्यूबवेल से पहले लंबित आवेदनों को मंजूरी दी जाना चाहिए ताकि किसान सिंचाई के मामले में आत्मनिर्भर हो सकें।
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गौरतलब है कि भूगर्भ जल वैज्ञानिकों ने बुंदेलखंड में अंधाधुंध भूजल दोहन से धरती फटने जैसे खतरों की चेतावनी दे रखी है। गत वर्षों में कई जगह ऐसी घटनाएं हुईं हैं। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि जलस्तर भी साल-दर-साल तेजी से नीचे खिसक रहा है। जो ट्यूबवेल लगे हैं वही बंद होते जा रहे हैं। ऐसे में नए ट्यूबवेल कितने कारगर होंगे यह पहेली है। दरअसल हाल ही में प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि बुंदेलखंड में 3000 नए नलकूप लगाए जाएंगे।
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यहां पर उल्लेखनीय है कि बड़ी संख्या में बुंदेलखंड में किसानों ने निजी नलकूप के लिए आवेदन कर रखे हैं और उन्हें ही इसकी स्वीकृति नहीं मिल रही। सबसे बड़ा अड़ंगा बिजली कनेक्शन का है। सिर्फ चित्रकूटधाम मंडल के चार जिलों में ही 6582 आवेदन पिछले करीब चार वर्षाें से लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा 3000 आवेदन पत्र बांदा जनपद में हैं। चित्रकूट में 2350, हमीरपुर में 1136 और महोबा में 96 आवेदन पत्र फाइलों में दबे पडे़ हैं। इस बाबत पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियंता एसएन वाजपेयी बोले कि ट्यूबवेलों को कनेक्शन देने के लिए हर वर्ष सरकार लक्ष्य निर्धारित करती है। आवेदनपत्रों की संख्या में यह काफी कम होता है। इसी से आवेदन पत्रों की सूची बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि नए ट्यूबवेल से पहले लंबित आवेदनों को मंजूरी दी जाना चाहिए ताकि किसान सिंचाई के मामले में आत्मनिर्भर हो सकें।
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