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मंडल के 250 गांवों की माटी खेती लायक नहीं

Thu, 19 Jun 2014 05:31 AM IST
Banda
Banda Updated Thu, 19 Jun 2014 05:31 AM IST
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मिट्टी के नमूनों की जांच में मिली उर्वरा शक्ति में बेहद कमी
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बांदा। बुंदेलखंड की बेहद उपजाऊ मिट्टी की उर्वरा शक्ति अब घटती जा रही है। कृषि विभाग द्वारा लिए मिट्टी के नमूनों की जांच में मंडल के करीब 250 गांवों की मिट्टी में उर्वरा शक्ति सबसे कम पाई गई। इनमें करीब 60 गांव ऐसे हैं जहां नाइट्रोजन व फास्फोरस की मात्रा बिल्कुल कम पाई गई। अन्य गांवों में भी खेती बहुत कम उपज देने वाली है। माटी में नाइट्रोजन व फास्फोरस की मात्रा कम पाए जाने के कारण कृषि विभाग भी चौकन्ना हो गया है। चारो जिलों में चित्रकूट की स्थिति बेहद खराब है। यहां सभी ब्लाकों में नाइट्रोजन व फास्फोरस की मात्रा तकरीबन खत्म है।
पिछले साल कृषि विभाग ने खेतों की मिट्टी लेकर जांच कराई थी। इनमें जिस तरह से पोषक तत्वों की मात्रा घट रही है वह चिंताजनक है। मंडल में कई ब्लाक व गांव ऐसे हैं, जहां स्थिति बेहद खराब है। बांदा जनपद में बड़ोखर, जसपुरा, कमासिन, महुआ, बिसंडा व तिंदवारी ब्लाक की माटी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा ‘लो’ की स्थिति में है। जबकि पोटाश मध्यम है। बबेरू व नरैनी में खेतों से फासफोरस बिल्कुल गायब हैं। चित्रकूट में कर्वी, मानिकपुर, पहाड़ी, रामनगर, मऊ में स्थिति और भयावह है। यहां नाइट्रोजन व फास्फोरस ‘वेरी लो’ की स्थिति में हैं। महोबा जनपद के कबरई, चरखारी, जैतपुर व पनवाड़ी ब्लाकों में नाइट्रोजन न्यूनतम और फास्फोरसर अति न्यूनतम श्रेणी में है। हमीरपुर कुरारा, सरीला व मुस्करा में नाइट्रोजन अति न्यूनतम स्थिति में हैं। यहां पोटाश व फास्फोरस की स्थिति कुछ ठीक है।
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बांदा जनपद में जसपुरा, बबेरू नरैनी के 76 गांवों में मिट्टी से नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व गायब होने से खेती पैदावार योग्य नहीं रह गई है। वहीं चित्रकूट के सबसे ज्यादा सभी ब्लाकों में 143 गांवों की माटी बंजर हो चुकी है। वहीं महोबा जिले के कबरई ब्लाक में क्रेशरों ने जमीन को बंजर कर दिया है। कबरई और चरखारी के 16 गांवों की माटी से पोषक तत्व गायब हैं। हमीरपुर में स्थिति अन्य जिलों के सापेक्ष कुछ ठीक है। यहां कुरारा, सरीला व मुस्करा के सिर्फ 15 गांवों में खेती की स्थिति चिंताजनक है। मृदा जांच प्रयोगशाला के सहायक निदेशक श्याम सिंह ने बताया कि जैविक खादों के बजाए रासायनिक खादों के अधाधुंध प्रयोग से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। यदि किसान जैविक खेती को अपनाएं तो स्थिति सुधर सकती है। नाइट्रोजन जड़ को मजबूत करता है और फास्फोरस तने को मजबूती देता है। ज्यादातर क्षेत्रों में दोनों पोषकतत्व गायब होने से स्थिति चिंताजनक है।
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पोषक तत्वों का संतुलन जरूरी
बांदा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मुलायम सिंह परिहार का कहना है कि अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की जांच के बाद पोषक तत्वों को संतुलित करना जरूरी है। जैविक खादों के इस्तेमाल से ही पोषक तत्वों की कमी दूर की जा सकती है।

घर में ही तैयार करें जैविक खाद
बांदा। बड़ोखर खुर्द के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने कहा कि मृदा परीक्षण विभाग के आंकड़े पूरी तरह विश्वसनीय नहीं कहे जा सकते। फिर भी रासायनिक खाद तो पैदावार को नुकसान पहुंचा ही रही है। बैलों की जोड़ी गायब होने से भी उर्वरा शक्ति कम हुई है। उन्होंने किसानों को घरों में ही देशी खाद बनाकर फसलों में इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसके लिए कृषि विभाग से हर तरह का सहयोग भी मिलता है।
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