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कीटों से बचाव को दवा छिड़के
Banda
Updated Wed, 23 Oct 2013 05:41 AM IST
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बांदा। धान व दलहनी तिलहनी फसलों को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाएं इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
उप निदेशक कृषि रक्षा ने कहा है कि इस समय धान में गंधीवग और टिड्डा कीटों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। इससे बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम मैलाथियान, फैंथोएट व फैनलवेलरेट डस्ट का छिड़काव करें। सैनिक कीट (सूड़ी) दिखाई देने पर क्लोरोपाइरीफास (20 ईसी),व क्यूनालफास डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार उर्द, मूंग व तिल में फली भेदक से बचाने को क्यूनालफास और अरहर में पत्ती लपेटक की कीट खत्म करने के लिए मोनोकोटोफास व फैनलवेलरेट लाभकारी है। ब्यूरो
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उप निदेशक कृषि रक्षा ने कहा है कि इस समय धान में गंधीवग और टिड्डा कीटों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। इससे बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम मैलाथियान, फैंथोएट व फैनलवेलरेट डस्ट का छिड़काव करें। सैनिक कीट (सूड़ी) दिखाई देने पर क्लोरोपाइरीफास (20 ईसी),व क्यूनालफास डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार उर्द, मूंग व तिल में फली भेदक से बचाने को क्यूनालफास और अरहर में पत्ती लपेटक की कीट खत्म करने के लिए मोनोकोटोफास व फैनलवेलरेट लाभकारी है। ब्यूरो