{"_id":"41-113446","slug":"Banda-113446-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"रैबीज वैक्सीन की गाइड लाइन पर नहीं हो रहा अमल!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रैबीज वैक्सीन की गाइड लाइन पर नहीं हो रहा अमल!
Banda
Updated Fri, 04 Jan 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंकज शर्मा
बांदा। रैबीज पैदा करने वाले जानवर के काट लेने पर सरकारी अस्पताल में मरीज को लगाई जाने वाली वैक्सीन के बाबत शासन से जारी दिशा-निर्देशों का यहां कड़ाई से पालन नहीं हो रहा। मरीज की मंशा पर ही वैक्सीन इंजेक्शन लगा दिया जा रहा है। निर्देश यह हैं कि वैक्सीन लगाने से पहले मरीज से कुछ जानकारियां ली जाएं। जिस जानवर ने काटा है उस पर 10 दिन तक नजर रखी जाए लेकिन इस सारी बातों को नजर अंदाज कर अस्पताल में वैक्सीन लगाई जा रही है।
कुत्ता, बिल्ली, बंदर, नेवला आदि जानवरों के काट लेने पर रैबीज होने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए एंटी रैबीज वैक्सीन इस्तेमाल की जाती है। इस वैक्सीन की बाजार में कीमत लगभग 600 रुपए है वहीं जिला अस्पताल में यह वैक्सीन मुफ्त मिलती है। नतीजे में अधिकांश लोग जिला अस्पताल में ही वैक्सीन के लिए ही पहुंचते हैं।
जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि औसतन रोजाना 30-35 मरीज इस वैक्सीन के लिए अस्पताल आते हैं। दिन-ब-दिन इसकी मांग बढ़ी है। कुछ मामलों में वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं होती लेकिन जानवर के काटने से डरा-सहमा व्यक्ति वैक्सीन लगवाने को हलाकान रहता है इसीलिए स्वास्थ्य निदेशक ने सभी मुख्य अधिकारियों और चिकित्साधीक्षकों को कुछ दिनों पूर्व दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि वैक्सीन की उपयोगिता और दुष्प्रभावों की जानकारियां संबंधी बोर्ड अस्पतालों में लगाए जाएं ताकि अनावश्यक रूप से लोग वैक्सीन न लगवाएं लेकिन यहां स्वास्थ्य विभाग ने निदेशक के आदेशों को तवज्जो नहीं दी। नतीजे में वैक्सीनों की खपत नहीं घटी।
विज्ञापन
दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि जानवर काटने की तीन श्रेणियां हैं। पहली जानवर ने सिर्फ छुआ हो। इसमें वैक्सीन की जरूरत नहीं बताई गई है। वहीं दूसरी श्रेणी में कुत्ता, बिल्ली, सियार आदि ने जीभ या लार लगा दी हो और घाव से खून बह रहा हो व तीसरी श्रेणी में जानवर मांस नोच ले गया हो तभी वैक्सीन की जरूरत बताई गई लेकिन यहां मरीज की मांग पर सीधे वैक्सीन लगाई जा रही है। हालांकि सीएमएस डा.शेखर का कहना है कि गाइड लाइन के मुताबिक ही लोगों को वैक्सीन इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार मरीज को वैक्सीन की जरूरत न होने पर समझाया भी जाता है पर वे नहीं मनाते। उसे इंजेक्शन लगवाने पर ही संतुष्टि मिलती है।
विज्ञापन
बांदा। रैबीज पैदा करने वाले जानवर के काट लेने पर सरकारी अस्पताल में मरीज को लगाई जाने वाली वैक्सीन के बाबत शासन से जारी दिशा-निर्देशों का यहां कड़ाई से पालन नहीं हो रहा। मरीज की मंशा पर ही वैक्सीन इंजेक्शन लगा दिया जा रहा है। निर्देश यह हैं कि वैक्सीन लगाने से पहले मरीज से कुछ जानकारियां ली जाएं। जिस जानवर ने काटा है उस पर 10 दिन तक नजर रखी जाए लेकिन इस सारी बातों को नजर अंदाज कर अस्पताल में वैक्सीन लगाई जा रही है।
कुत्ता, बिल्ली, बंदर, नेवला आदि जानवरों के काट लेने पर रैबीज होने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए एंटी रैबीज वैक्सीन इस्तेमाल की जाती है। इस वैक्सीन की बाजार में कीमत लगभग 600 रुपए है वहीं जिला अस्पताल में यह वैक्सीन मुफ्त मिलती है। नतीजे में अधिकांश लोग जिला अस्पताल में ही वैक्सीन के लिए ही पहुंचते हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि औसतन रोजाना 30-35 मरीज इस वैक्सीन के लिए अस्पताल आते हैं। दिन-ब-दिन इसकी मांग बढ़ी है। कुछ मामलों में वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं होती लेकिन जानवर के काटने से डरा-सहमा व्यक्ति वैक्सीन लगवाने को हलाकान रहता है इसीलिए स्वास्थ्य निदेशक ने सभी मुख्य अधिकारियों और चिकित्साधीक्षकों को कुछ दिनों पूर्व दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि वैक्सीन की उपयोगिता और दुष्प्रभावों की जानकारियां संबंधी बोर्ड अस्पतालों में लगाए जाएं ताकि अनावश्यक रूप से लोग वैक्सीन न लगवाएं लेकिन यहां स्वास्थ्य विभाग ने निदेशक के आदेशों को तवज्जो नहीं दी। नतीजे में वैक्सीनों की खपत नहीं घटी।
विज्ञापन
दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि जानवर काटने की तीन श्रेणियां हैं। पहली जानवर ने सिर्फ छुआ हो। इसमें वैक्सीन की जरूरत नहीं बताई गई है। वहीं दूसरी श्रेणी में कुत्ता, बिल्ली, सियार आदि ने जीभ या लार लगा दी हो और घाव से खून बह रहा हो व तीसरी श्रेणी में जानवर मांस नोच ले गया हो तभी वैक्सीन की जरूरत बताई गई लेकिन यहां मरीज की मांग पर सीधे वैक्सीन लगाई जा रही है। हालांकि सीएमएस डा.शेखर का कहना है कि गाइड लाइन के मुताबिक ही लोगों को वैक्सीन इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार मरीज को वैक्सीन की जरूरत न होने पर समझाया भी जाता है पर वे नहीं मनाते। उसे इंजेक्शन लगवाने पर ही संतुष्टि मिलती है।