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गांव वाले बात नहीं करते, पानी लेने पर धोते हैं नल
Updated Mon, 12 Nov 2018 11:37 PM IST
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बांदा। ‘साहब, हमसे पूरा गांव बात नहीं करता। मुंह फेर लेता है। हम जिस नल से पानी लेने जाते हैं, वहां लोग नल धोने लगते हैं। मां-बाप की मौत के बाद छोटी सी ही उम्र में टीबी और एक अन्य जानलेवा बीमारी ने जकड़ लिया।
माता-पिता का सिर से साया उठते ही खानदानियों ने बेघर कर दिया। हम तीन भाई-बहन अब अपने एक पारिवारिक बाबा की शरण में जीवन बसर कर रहे हैं’। यह मार्मिक दास्तान बच्चों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में डीएम हीरालाल को सुनाते हुए अर्जी दी है। डीएम ने बच्चों की मदद के लिए एसडीएम को निर्देश दिए हैं।
बबेरू तहसील के एक गांव के लगभग 12 वर्षीय बालक ने डीएम से मिलकर आपबीती बताई। यह बालक स्वयंसेवी संगठन बाल आवाज की बुंदेलखंड प्रतिनिधि बीनू सिंह और इसी संगठन के अभिमन्यु सिंह के साथ डीएम से मिलने आया था।
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बताया कि करीब 8 साल पहले उसे टीबी की बीमारी हो गई थी। तब पिता ने इलाज कराया था। कुछ साल पूर्व पिता और माता की मौत हो गई। उनके बाद बाबा के घरवालों ने हम तीनों भाई-बहनों का सामान निकाल फेंका। यूपी-100 पुलिस ने खानदानियों को आकर डांटा-फटकारा। बाद में पारिवारिक बाबा ने हमें शरण दी। समाजसेवियों की पैरवी से हमारा इलाज शुरू हो गया। 12 वर्षीय भाई और 5 वर्षीय बहन का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। समाजसेवी बीनू सिंह और शिवपूजन सिंह फल, दूध और भोजन का इंतजाम कर रहे हैं।
बालक ने बताया कि इसी हफ्ते दिवाली पर बबेरू एसडीएम ने मिठाई और पटाखे दिए थे। इसके पहले तहसील से 2500 रुपये दिलवाए थे। पिता का बीपीएल कार्ड था, जिसमें मुफ्त अनाज मिलता था। अब नहीं मिलता। न ही पोषण सामग्री मिलती है।
बालक ने डीएम से मांग की कि उसके पिता के हिस्से की भूमि उसके नाम दर्ज कराई जाए। उसे और भाई-बहनों को स्वास्थ्य सुविधा गांव में ही उपलब्ध कराया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना से घर दिलवाया जाए। पोषण के लिए बकरी दी जाए, ताकि दूध से दवा ले सकें।
बच्चों ने सरकार की ओर से 2000 रुपये प्रतिमाह की भी मांग की है। बच्चों के साथ आए अभिमन्यु सिंह ने बताया कि डीएम हीरा लाल ने भरोसा दिलाया है कि बच्चे बबेरू एसडीएम से मिलें। वे पूरी मदद करेंगे।
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माता-पिता का सिर से साया उठते ही खानदानियों ने बेघर कर दिया। हम तीन भाई-बहन अब अपने एक पारिवारिक बाबा की शरण में जीवन बसर कर रहे हैं’। यह मार्मिक दास्तान बच्चों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में डीएम हीरालाल को सुनाते हुए अर्जी दी है। डीएम ने बच्चों की मदद के लिए एसडीएम को निर्देश दिए हैं।
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बबेरू तहसील के एक गांव के लगभग 12 वर्षीय बालक ने डीएम से मिलकर आपबीती बताई। यह बालक स्वयंसेवी संगठन बाल आवाज की बुंदेलखंड प्रतिनिधि बीनू सिंह और इसी संगठन के अभिमन्यु सिंह के साथ डीएम से मिलने आया था।
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बताया कि करीब 8 साल पहले उसे टीबी की बीमारी हो गई थी। तब पिता ने इलाज कराया था। कुछ साल पूर्व पिता और माता की मौत हो गई। उनके बाद बाबा के घरवालों ने हम तीनों भाई-बहनों का सामान निकाल फेंका। यूपी-100 पुलिस ने खानदानियों को आकर डांटा-फटकारा। बाद में पारिवारिक बाबा ने हमें शरण दी। समाजसेवियों की पैरवी से हमारा इलाज शुरू हो गया। 12 वर्षीय भाई और 5 वर्षीय बहन का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। समाजसेवी बीनू सिंह और शिवपूजन सिंह फल, दूध और भोजन का इंतजाम कर रहे हैं।
बालक ने बताया कि इसी हफ्ते दिवाली पर बबेरू एसडीएम ने मिठाई और पटाखे दिए थे। इसके पहले तहसील से 2500 रुपये दिलवाए थे। पिता का बीपीएल कार्ड था, जिसमें मुफ्त अनाज मिलता था। अब नहीं मिलता। न ही पोषण सामग्री मिलती है।
बालक ने डीएम से मांग की कि उसके पिता के हिस्से की भूमि उसके नाम दर्ज कराई जाए। उसे और भाई-बहनों को स्वास्थ्य सुविधा गांव में ही उपलब्ध कराया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना से घर दिलवाया जाए। पोषण के लिए बकरी दी जाए, ताकि दूध से दवा ले सकें।
बच्चों ने सरकार की ओर से 2000 रुपये प्रतिमाह की भी मांग की है। बच्चों के साथ आए अभिमन्यु सिंह ने बताया कि डीएम हीरा लाल ने भरोसा दिलाया है कि बच्चे बबेरू एसडीएम से मिलें। वे पूरी मदद करेंगे।