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खेतों में नाइट्रोजन ‘न्यून’ श्रेणी पर
Updated Sun, 27 Aug 2017 05:15 PM IST
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में खेतों से ‘आर्गेनिक कार्बन’ (नाइट्रोजन) तेजी से घट रहा है। इसकी वजह खेतों में जरूरत से ज्यादा रासायनिक खादों का इस्तेमाल है। फास्फोरस और पोटाश आदि तत्व भी कम हो रहे हैं। बांदा जनपद के सभी ब्लाकों में कार्बन ‘न्यून’ (लो) पाया गया। इसका खुलासा मृदा परीक्षण में हुआ।
मंडल के चारों जनपदों में इस वर्ष 96,698 मिट्टी के नमूने लेकर परीक्षण का लक्ष्य है। अब तक 36,454 नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें 12,895 की जांच हुई। इसमें ‘कार्बन’ की स्थिति सही नहीं पाई गई। जनपद के सभी आठ ब्लाकों में यह न्यून श्रेणी में है। फास्फोरस व पोटाश मध्यम श्रेणी में है।
मृदा विभाग के शोध सहायक श्रीकृष्ण ने बताया कि खेतों में पांच फिट गहराई तक मिट्टी से पोषकतत्व गायब हो रहे हैं। यह स्थिति जमीन को बंजर की कगार पर पहुंचाने वाली है। खाद और रसायन के अंधाधुंध इस्तेमाल से यह स्थिति पैदा हुई है। साथ ही मिट्टी से केंचुआ आदि जंतु भी नष्ट हो रहे हैं।
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रोक के बावजूद खेतों में किसान आग लगा देते हैं। इससे भी जमीन की ताकत खत्म होती है। मंडल के चारों जिलों में किसी खेत की मिट्टी में हाई वैल्यू (उच्च स्तरीय तत्व) नहीं पाया गया। उन्होंने बताया कि जैविक खाद से ही जमीन की ताकत लौट सकती है।
शोध सहायक ने बताया कि नाइट्रोजन की कमी से फसल कमजोर और पीली पड़ जाती है। दाना सिकुड़कर हल्का हो जाता है। जड़ कमजोर होने से पौधा झुकने लगता है। उत्पादन में गिरावट आने लगती है। फास्फोरस व पोटाश भी न्यून होने पर खेत बंजर की श्रेणी में आ जाता है। जैविक खाद से खेतों की उपज अच्छी कर सकते हैं।
-चित्रकूटधाम मंडल में तेजी से नदारद हो रहे मिट्टी से पोषकतत्व
-फास्फोरस और पोटाश में भी तेजी से गिरावट
-मंडल में 12,895 नमूनों की जांच से खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
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मंडल के चारों जनपदों में इस वर्ष 96,698 मिट्टी के नमूने लेकर परीक्षण का लक्ष्य है। अब तक 36,454 नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें 12,895 की जांच हुई। इसमें ‘कार्बन’ की स्थिति सही नहीं पाई गई। जनपद के सभी आठ ब्लाकों में यह न्यून श्रेणी में है। फास्फोरस व पोटाश मध्यम श्रेणी में है।
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मृदा विभाग के शोध सहायक श्रीकृष्ण ने बताया कि खेतों में पांच फिट गहराई तक मिट्टी से पोषकतत्व गायब हो रहे हैं। यह स्थिति जमीन को बंजर की कगार पर पहुंचाने वाली है। खाद और रसायन के अंधाधुंध इस्तेमाल से यह स्थिति पैदा हुई है। साथ ही मिट्टी से केंचुआ आदि जंतु भी नष्ट हो रहे हैं।
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रोक के बावजूद खेतों में किसान आग लगा देते हैं। इससे भी जमीन की ताकत खत्म होती है। मंडल के चारों जिलों में किसी खेत की मिट्टी में हाई वैल्यू (उच्च स्तरीय तत्व) नहीं पाया गया। उन्होंने बताया कि जैविक खाद से ही जमीन की ताकत लौट सकती है।
शोध सहायक ने बताया कि नाइट्रोजन की कमी से फसल कमजोर और पीली पड़ जाती है। दाना सिकुड़कर हल्का हो जाता है। जड़ कमजोर होने से पौधा झुकने लगता है। उत्पादन में गिरावट आने लगती है। फास्फोरस व पोटाश भी न्यून होने पर खेत बंजर की श्रेणी में आ जाता है। जैविक खाद से खेतों की उपज अच्छी कर सकते हैं।
-चित्रकूटधाम मंडल में तेजी से नदारद हो रहे मिट्टी से पोषकतत्व
-फास्फोरस और पोटाश में भी तेजी से गिरावट
-मंडल में 12,895 नमूनों की जांच से खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो