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तीमारदारों को नहीं दिया जा रहा खाना
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल में मरीजों के खाने में खेल हो रहा है। शासन के निर्देशों के बाद भी तीमारदारों को खाना नहीं दिया जा रहा। खाने की गुणवत्ता भी घटिया है। मेन्यू को दरकिनार कर रोजाना दाल, रोटी व खिचड़ी ही परोसी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले माह 21 फरवरी को महानिदेशक चिकित्सा केके गुप्ता ने सभी सीएमओ व सीएमएस को निर्देश दिए थे कि पहली मार्च से जिला अस्पतालों में मरीज के साथ एक तीमारदार को भी खाना दिया जाए। लेकिन यहां इस आदेश पर अमल नहीं हो रहा। मरीजों और तीमारदारों द्वारा खाने की गुणवत्ता पर भी सवार किए जा रहे हैं। इमरजेंसी पुरुष वार्ड के बेड नंबर-15 में भर्ती मरीज राजकुमार की पत्नी कलुइया ने बताया 5 दिनों में उसे एक भी दिन खाना नहीं मिला।
अस्पताल परिसर में खाना बनाकर खाती हैं। इसी वार्ड में बेड नंबर-6 में भर्ती मरीज गयादीन के बेटे चौबेलाल ने बताया कि तीमारदार तो दूर मरीज को दिया जाने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है। रोजाना दाल, रोटी, सब्जी दी जाती है। दूध कुछ ही मरीजों को दिया जाता है। वह भी पानी की मिलावट से भरपूर होता है।
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डाक्टरों की मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा कागजों में अस्पताल के शत-प्रतिशत भर्ती मरीजों को खाना दिया जाना दर्शाया जा रहा है। जबकि खाना 50 फीसदी मरीजों को ही दिया जाता है। अब तीमारदारों के नाम पर खेल किया जा रहा है। उधर, ठेकेदार राजेश पांडेय का कहना है कि तीमारदार को भी खाना देने का उन्हें फिलहाल कोई आदेश नहीं मिला है। उधर, सीएमएस डा. किशोरीलाल ने भी ऐसे किसी शासनादेश के मिलने से इनकार किया है।
जिला अस्पताल में मरीजों के खाने में भी खेल, गुणवत्ता भी घटिया
अमर उजाला ब्यूरो
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले माह 21 फरवरी को महानिदेशक चिकित्सा केके गुप्ता ने सभी सीएमओ व सीएमएस को निर्देश दिए थे कि पहली मार्च से जिला अस्पतालों में मरीज के साथ एक तीमारदार को भी खाना दिया जाए। लेकिन यहां इस आदेश पर अमल नहीं हो रहा। मरीजों और तीमारदारों द्वारा खाने की गुणवत्ता पर भी सवार किए जा रहे हैं। इमरजेंसी पुरुष वार्ड के बेड नंबर-15 में भर्ती मरीज राजकुमार की पत्नी कलुइया ने बताया 5 दिनों में उसे एक भी दिन खाना नहीं मिला।
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अस्पताल परिसर में खाना बनाकर खाती हैं। इसी वार्ड में बेड नंबर-6 में भर्ती मरीज गयादीन के बेटे चौबेलाल ने बताया कि तीमारदार तो दूर मरीज को दिया जाने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है। रोजाना दाल, रोटी, सब्जी दी जाती है। दूध कुछ ही मरीजों को दिया जाता है। वह भी पानी की मिलावट से भरपूर होता है।
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डाक्टरों की मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा कागजों में अस्पताल के शत-प्रतिशत भर्ती मरीजों को खाना दिया जाना दर्शाया जा रहा है। जबकि खाना 50 फीसदी मरीजों को ही दिया जाता है। अब तीमारदारों के नाम पर खेल किया जा रहा है। उधर, ठेकेदार राजेश पांडेय का कहना है कि तीमारदार को भी खाना देने का उन्हें फिलहाल कोई आदेश नहीं मिला है। उधर, सीएमएस डा. किशोरीलाल ने भी ऐसे किसी शासनादेश के मिलने से इनकार किया है।
जिला अस्पताल में मरीजों के खाने में भी खेल, गुणवत्ता भी घटिया
अमर उजाला ब्यूरो