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मिशन की महिलाएं अब शहद से बढ़ाएंगी आय
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। खेती-किसानी, मुर्गी व बकरी पालन के जरिए स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ रहीं एनआरएलएम समूह की महिलाएं अब मधुमक्खी पालन से भी आमदनी बढ़ाएंगी। इसके लिए अभी नरैनी विकास खंड की 30 महिलाओं का चयन किया गया है। इन्हें जल्द प्रशिक्षण देकर इलाहाबाद स्थित मौन पालन विभाग का एक्सपोजर भ्रमण कराकर बारीकियां सिखाईं जाएंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) भारत सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका क्रियान्वयन गरीबी उन्मूलन पर आधारित है। वर्ष 2012-13 में इसकी शुरुआत हुई थी। अब तक जिले में 30 हजार से अधिक गरीब महिलाएं समूह की सदस्य बन चुकीं हैं। संचालित कार्यक्रमों में अब मधुमक्खी पालन भी कार्यक्रम जुड़ गया है। स्थानीय स्तर पर इसे अमली जामा पहनाया जाने लगा है।
जनपद के इंटेंसिव (सघन) विकास खंड नरैनी के ग्राम गुढ़ा की आठ, पथरा की छ:, परसहर व नवगवां की पांच-पांच, जोगिन पुरवा की चार व मुकेरा की दो एनआरएलएम समूह महिलाओं का चयन हो चुका है। इन्हें विकासखंड स्तर पर मधुमक्खी पालन के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद इलाहाबाद स्थित मौन पालन विभाग का भ्रमण कर महिलाएं शहद उत्पादन की बारीकियां सीखेंगी। मधुमक्खी पालन के लिए महिलाएं अपने समूहों से आर्थिक मदद लेंगी। समूहों को सीआईएफ व आरएफ के तहत एनआरएलएम द्वारा आर्थिक मदद दी जाती है।
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बुंदेलखंड में अक्सर पानी की कमी के चलते सिंचाई की समस्या रहती है, जिससे यहां फूल वाली फसलें ज्यादा पैदा होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू कराया जा रहा है कि एनआरएलएम समूह की महिलाओं को स्वरोजगार का एक और अवसर मिल सके।
- कृष्ण करूणाकर पांडे
उपायुक्त एनआरएलएम, बांदा।
एनआरएलएम से संचालित कार्य : मुर्गी पालन, बकरी पालन, सब्जी उत्पादन, खेती-किसानी, डेयरी आदि। जनपद में गठित समूहों में नरैनी में 775, बड़ोखर में 642, बबेरू में 330, बिसंडा में 300, महुआ में 250, तिंदवारी में 250, कमासिन में 180 और जसपुरा में 150 महिला समूह हैं।
-एनआरएलएम समूहों का एक और कदम
-नरैनी ब्लाक की 30 महिलाओं को मिलेगी ट्रेनिंग
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बांदा। खेती-किसानी, मुर्गी व बकरी पालन के जरिए स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ रहीं एनआरएलएम समूह की महिलाएं अब मधुमक्खी पालन से भी आमदनी बढ़ाएंगी। इसके लिए अभी नरैनी विकास खंड की 30 महिलाओं का चयन किया गया है। इन्हें जल्द प्रशिक्षण देकर इलाहाबाद स्थित मौन पालन विभाग का एक्सपोजर भ्रमण कराकर बारीकियां सिखाईं जाएंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) भारत सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका क्रियान्वयन गरीबी उन्मूलन पर आधारित है। वर्ष 2012-13 में इसकी शुरुआत हुई थी। अब तक जिले में 30 हजार से अधिक गरीब महिलाएं समूह की सदस्य बन चुकीं हैं। संचालित कार्यक्रमों में अब मधुमक्खी पालन भी कार्यक्रम जुड़ गया है। स्थानीय स्तर पर इसे अमली जामा पहनाया जाने लगा है।
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जनपद के इंटेंसिव (सघन) विकास खंड नरैनी के ग्राम गुढ़ा की आठ, पथरा की छ:, परसहर व नवगवां की पांच-पांच, जोगिन पुरवा की चार व मुकेरा की दो एनआरएलएम समूह महिलाओं का चयन हो चुका है। इन्हें विकासखंड स्तर पर मधुमक्खी पालन के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद इलाहाबाद स्थित मौन पालन विभाग का भ्रमण कर महिलाएं शहद उत्पादन की बारीकियां सीखेंगी। मधुमक्खी पालन के लिए महिलाएं अपने समूहों से आर्थिक मदद लेंगी। समूहों को सीआईएफ व आरएफ के तहत एनआरएलएम द्वारा आर्थिक मदद दी जाती है।
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बुंदेलखंड में अक्सर पानी की कमी के चलते सिंचाई की समस्या रहती है, जिससे यहां फूल वाली फसलें ज्यादा पैदा होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू कराया जा रहा है कि एनआरएलएम समूह की महिलाओं को स्वरोजगार का एक और अवसर मिल सके।
- कृष्ण करूणाकर पांडे
उपायुक्त एनआरएलएम, बांदा।
एनआरएलएम से संचालित कार्य : मुर्गी पालन, बकरी पालन, सब्जी उत्पादन, खेती-किसानी, डेयरी आदि। जनपद में गठित समूहों में नरैनी में 775, बड़ोखर में 642, बबेरू में 330, बिसंडा में 300, महुआ में 250, तिंदवारी में 250, कमासिन में 180 और जसपुरा में 150 महिला समूह हैं।
-एनआरएलएम समूहों का एक और कदम
-नरैनी ब्लाक की 30 महिलाओं को मिलेगी ट्रेनिंग