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पहले गर्भधारण में मिलेंगे 5000 रुपये
Fri, 05 Apr 2019 10:57 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
banda
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Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 05 Apr 2019 10:57 PM IST
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डेमो
- फोटो : amar ujala
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पहली बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए नि:शुल्क पंजीकरण किया जा रहा है। अब तक लगभग 15 हजार महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुकी हैं।
योजना के तहत पहली बार गर्भवती हुई महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए पंजीकरण के साथ ही पहली किश्त के रूप में एक हजार रुपये दिए जाते हैं। प्रसव के पहले एक जांच होने पर (गर्भावस्था के छह माह बाद) दूसरी किश्त के रूप में दो हजार रुपये मिलेंगे। बच्चे के जन्म का पंजीकरण होने और पहले चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर तीसरी किश्त में भी दो हजार रुपये दिए जाएंगे। यह सभी किश्तें गर्भवती के बैंक खाते में जाएंगी। इसके लिए खाते का आधार से लिंक होना जरूरी है। पंजीकरण आनलाइन होता है।
जनपद के डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) नीरज सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 15 हजार से अधिक महिलाओं को प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत आठ से 22 मार्च तक सुपोषित जननी, विकसित धरनी के नाम से चले पखवारे में प्रथम बार गर्भवती हुई महिलाओं के कुल 754 पंजीकरण हुए। इसमें बांदा शहर की मात्र 15 महिलाएं थीं।
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डीसीपीएम ने बताया कि इस योजना के लिए गर्भवती महिला का गरीबी रेखा से नीचे होना या प्रसव सरकारी संस्थान में होना जरूरी नहीं है। बशर्त वो किसी सरकारी नौकरी में न हो। उसके पास आधार कार्ड और बैंक खाता हो। यह आधार से लिंक हो। लाभार्थी का पैसा सीधे खाते में जाएगा। प्रोत्साहन राशि तीन किश्तों में भेजी जाती है। बताया कि आशाबहुओं द्वारा गृह भ्रमण कर पहली बार गर्भवती बनी महिलाओं को चिन्हित कर उनका पंजीकरण किया जा रहा है।
बांदा। गर्भवती महिलाओं में बड़ी संख्या में कुपोषित भी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 50 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। जब तक महिलाएं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य नहीं होंगी, तब तक उनका बच्चा भी सेहतमंद नहीं होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं पर काम का बोझ अधिक है। गर्भावस्था में भी काम करना पड़ता है।
इससे शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत गर्भावस्था के दौरान काम न कर पाने से हुए आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति और शरीर की अतिरिक्त पोषण जरूरतों के लिए पांच हजार रुपये बतौर मुआवजा दिया जाता है। ब्यूरो
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योजना के तहत पहली बार गर्भवती हुई महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए पंजीकरण के साथ ही पहली किश्त के रूप में एक हजार रुपये दिए जाते हैं। प्रसव के पहले एक जांच होने पर (गर्भावस्था के छह माह बाद) दूसरी किश्त के रूप में दो हजार रुपये मिलेंगे। बच्चे के जन्म का पंजीकरण होने और पहले चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर तीसरी किश्त में भी दो हजार रुपये दिए जाएंगे। यह सभी किश्तें गर्भवती के बैंक खाते में जाएंगी। इसके लिए खाते का आधार से लिंक होना जरूरी है। पंजीकरण आनलाइन होता है।
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जनपद के डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) नीरज सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 15 हजार से अधिक महिलाओं को प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत आठ से 22 मार्च तक सुपोषित जननी, विकसित धरनी के नाम से चले पखवारे में प्रथम बार गर्भवती हुई महिलाओं के कुल 754 पंजीकरण हुए। इसमें बांदा शहर की मात्र 15 महिलाएं थीं।
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डीसीपीएम ने बताया कि इस योजना के लिए गर्भवती महिला का गरीबी रेखा से नीचे होना या प्रसव सरकारी संस्थान में होना जरूरी नहीं है। बशर्त वो किसी सरकारी नौकरी में न हो। उसके पास आधार कार्ड और बैंक खाता हो। यह आधार से लिंक हो। लाभार्थी का पैसा सीधे खाते में जाएगा। प्रोत्साहन राशि तीन किश्तों में भेजी जाती है। बताया कि आशाबहुओं द्वारा गृह भ्रमण कर पहली बार गर्भवती बनी महिलाओं को चिन्हित कर उनका पंजीकरण किया जा रहा है।
बांदा। गर्भवती महिलाओं में बड़ी संख्या में कुपोषित भी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 50 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। जब तक महिलाएं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य नहीं होंगी, तब तक उनका बच्चा भी सेहतमंद नहीं होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं पर काम का बोझ अधिक है। गर्भावस्था में भी काम करना पड़ता है।
इससे शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत गर्भावस्था के दौरान काम न कर पाने से हुए आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति और शरीर की अतिरिक्त पोषण जरूरतों के लिए पांच हजार रुपये बतौर मुआवजा दिया जाता है। ब्यूरो