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6 कमांडों की हत्या : 29 गवाहियां पूरी, आखिरी बहस शुरू
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बांदा। साढ़े 12 वर्ष पूर्व 22 जुलाई 2007 की रात फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे पर ठोकिया गिरोह से मुठभेड़ करके लौट रहे एसटीएफ कमांडो के वाहन पर घात लगाकर ठोकिया गिरोह द्वारा चलाई गई गोलियों से पांच कमांडो व चालक के साथ एक मुखबिर की मौत के मामले में अब अदालती फैसला नजदीक आ गया है। 29 लोगों की गवाही पूरी होने के बाद अब आखिरी बहस शुरू हो गई है।
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) श्री कृष्ण यादव की अदालत में अभियोजन ने गवाही शुरू की। अभियोजन के विशेष शासकीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने अदालत में कहा 22 जुलाई 2007 को रात 8 बजे से 9:15 बजे तक एसटीएफ जवानों ने बेड़ा पहाड़ जंगल में दस्यु दल को घेर लिया। मुठभेड़ में ठोकिया गैंग का हार्ड कोर सदस्य मइयादीन उर्फ पंडा उर्फ व्यापारी मारा गया। एसटीएफ जवान बोलेरो और टवेरा वाहनों पर लौट रहे थे तभी बघोलन तिराहे के पास दो पहाड़ों के बीच से निकली सकरी सड़क के मध्य आगे चल रही एसटीएफ की बोलरो को बदमाशों ने घेर लिया और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। पांच कमांडो राजेश चौहान, लक्ष्मण शर्मा, गिरीशचंद्र नागर, बृजेश यादव व उमाशंकर यादव के साथ चालक ईश्वर देव सिंह की हत्या कर डकैत भाग निकले थे। इसी हमले में मुखबिर राजकरन की भी मौत हो गई थी। एसटीएफ जवानों पर हमला हुआ तो मुठभेड़ में मारे गए मइयादीन का शव भी बोलरो की छत पर रखा हुआ था।
इस मामले में कर्वी कोतवाली में धारा 147, 148, 149, 302, 307 आईपीसी और 10/12 डीए एक्ट तथा 7 क्रिमिनल ला एमेडमेंट और 5/25 विस्फोटक अधिनियम तथा 7/25 आम्र्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई। इसमें 16 नामजद हुए। इसमें मृतक मइयादीन भी शामिल था। विवेचना में पांच और नाम शामिल किए गए। कुल 21 हत्याभियुक्तों के विरुद्ध अलग-अलग चार्जशीटें न्यायालय में दाखिल की गई। विवेचना में शामिल किए गए पांच अभियुक्तों ने अब तक न तो आत्मसमर्पण किया न गिरफ्तार हुए। शुक्रवार को अभियुक्तों को जेल से अदालत न लाए जाने पर आगे बहस नहीं हो सकी। न्यायाधीश ने इसके लिए अब 4 मार्च निर्धारित की है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विचित्र वीर सिंह, रामस्वरूप सिंह और अशोक दीक्षित मौजूद रहे।
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क्लीनचिट पा चुके अनीस को तलब करने की अर्जी
बांदा। छह एसटीएफ कमांडो की हत्या के मामले में तत्कालीन दस्यु सरगना ठोकिया उर्फ अंबिका पटेल सहित नामजद किए गए 16 अभियुक्तों में नरैनी निवासी मोहम्मद अनीस भी नामजद था। उसे गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा था। बाद में बड़ी तादाद में क्षेत्रीय लोगों ने सामूहिक हस्ताक्षरों से अनीस को बेगुनाह फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। शासन ने सीबीसीआईडी से जांच कराई। सीबीसीआईडी अनीस को क्लीनचिट दे दी। 26 अगस्त 2011 को इस रिपोर्ट को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और अनीस की रिहाई के आदेश दे दिए लेकिन अब इस सामूहिक हत्याकांड की अदालत में बहस शुरू होते ही मंगलवार को अभियोजन की ओर से न्यायालय (विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र) में अर्जी दी गई है कि धारा 319 सीआरपीसी के तहत अनीस को अदालत में तलब किया जाए। इस अर्जी पर अगली तारीख (4 मार्च) को बहस होगी।
ठोकिया सहित दो मारे गए, एक फरार
हत्याकांड के नामजद आरोपियों में मुख्य दस्यु सरगना ठोकिया 2008 में ढेर कर दिया गया। एक अन्य नामजद राम सिंह उर्फ दद्दू गौड़ 2013 में पुलिस मुठभेड़ में मरा जा चुका है। नामजद आरोपी चुन्नीलाल पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। उसका आज तक कुछ पता नहीं चला।
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विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) श्री कृष्ण यादव की अदालत में अभियोजन ने गवाही शुरू की। अभियोजन के विशेष शासकीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने अदालत में कहा 22 जुलाई 2007 को रात 8 बजे से 9:15 बजे तक एसटीएफ जवानों ने बेड़ा पहाड़ जंगल में दस्यु दल को घेर लिया। मुठभेड़ में ठोकिया गैंग का हार्ड कोर सदस्य मइयादीन उर्फ पंडा उर्फ व्यापारी मारा गया। एसटीएफ जवान बोलेरो और टवेरा वाहनों पर लौट रहे थे तभी बघोलन तिराहे के पास दो पहाड़ों के बीच से निकली सकरी सड़क के मध्य आगे चल रही एसटीएफ की बोलरो को बदमाशों ने घेर लिया और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। पांच कमांडो राजेश चौहान, लक्ष्मण शर्मा, गिरीशचंद्र नागर, बृजेश यादव व उमाशंकर यादव के साथ चालक ईश्वर देव सिंह की हत्या कर डकैत भाग निकले थे। इसी हमले में मुखबिर राजकरन की भी मौत हो गई थी। एसटीएफ जवानों पर हमला हुआ तो मुठभेड़ में मारे गए मइयादीन का शव भी बोलरो की छत पर रखा हुआ था।
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इस मामले में कर्वी कोतवाली में धारा 147, 148, 149, 302, 307 आईपीसी और 10/12 डीए एक्ट तथा 7 क्रिमिनल ला एमेडमेंट और 5/25 विस्फोटक अधिनियम तथा 7/25 आम्र्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई। इसमें 16 नामजद हुए। इसमें मृतक मइयादीन भी शामिल था। विवेचना में पांच और नाम शामिल किए गए। कुल 21 हत्याभियुक्तों के विरुद्ध अलग-अलग चार्जशीटें न्यायालय में दाखिल की गई। विवेचना में शामिल किए गए पांच अभियुक्तों ने अब तक न तो आत्मसमर्पण किया न गिरफ्तार हुए। शुक्रवार को अभियुक्तों को जेल से अदालत न लाए जाने पर आगे बहस नहीं हो सकी। न्यायाधीश ने इसके लिए अब 4 मार्च निर्धारित की है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विचित्र वीर सिंह, रामस्वरूप सिंह और अशोक दीक्षित मौजूद रहे।
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क्लीनचिट पा चुके अनीस को तलब करने की अर्जी
बांदा। छह एसटीएफ कमांडो की हत्या के मामले में तत्कालीन दस्यु सरगना ठोकिया उर्फ अंबिका पटेल सहित नामजद किए गए 16 अभियुक्तों में नरैनी निवासी मोहम्मद अनीस भी नामजद था। उसे गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा था। बाद में बड़ी तादाद में क्षेत्रीय लोगों ने सामूहिक हस्ताक्षरों से अनीस को बेगुनाह फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। शासन ने सीबीसीआईडी से जांच कराई। सीबीसीआईडी अनीस को क्लीनचिट दे दी। 26 अगस्त 2011 को इस रिपोर्ट को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और अनीस की रिहाई के आदेश दे दिए लेकिन अब इस सामूहिक हत्याकांड की अदालत में बहस शुरू होते ही मंगलवार को अभियोजन की ओर से न्यायालय (विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र) में अर्जी दी गई है कि धारा 319 सीआरपीसी के तहत अनीस को अदालत में तलब किया जाए। इस अर्जी पर अगली तारीख (4 मार्च) को बहस होगी।
ठोकिया सहित दो मारे गए, एक फरार
हत्याकांड के नामजद आरोपियों में मुख्य दस्यु सरगना ठोकिया 2008 में ढेर कर दिया गया। एक अन्य नामजद राम सिंह उर्फ दद्दू गौड़ 2013 में पुलिस मुठभेड़ में मरा जा चुका है। नामजद आरोपी चुन्नीलाल पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। उसका आज तक कुछ पता नहीं चला।