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22 करोड़ के कर्जदार 13 हजार किसानों को नोटिस
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:24 PM IST
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इलाहाबाद बैंक में
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बांदा। दैवी आपदा से जूझ रहे कर्जदार किसानों की नींद फिर उड़ गई है। कर्ज वसूली पर प्रदेश सरकार द्वारा लगाई गई रोक से फिलहाल राहत महसूस कर रहे किसानों पर बैंकों ने कर्ज अदायगी के लिए दबाव की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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अलबत्ता सीधे कार्रवाई न कर लोक अदालत का सहारा लिया है। विभिन्न बैंकों के 13,361 कर्जदार किसानों पर पूर्व विवाद/वसूली वाद का मामला सिविल कोर्ट में दायर किया है। इस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इन किसानों को नोटिस जारी कर 12 नवंबर को मेगा लोक अदालत में तलब किया है। इसमें कहा है कि समझौता राशि पूरी या आंशिक साथ अवश्य लाएं।
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कई सालों से मौसम की मार ने बुंदेलखंड के किसानों को कंगाल और कर्जदार बना दिया है। किसानों के सिर पर कर्ज का बोझ लादने में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की भूमिका अहम रही। भारी तादाद में किसानों ने केसीसी से कर्ज ले लिया। लेकिन अपनी क्रेडिट दांव पर लगाने के बाद भी अपनी हालत नहीं सुधार पाए।
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फसल के दगा दे जाने से कर्ज की अदायगी भी नहीं हो पाई। उधर, सूखा और अतिवृष्टि के चलते प्रदेश सरकार ने वसूली पर सख्ती से रोक लगा रखी है। शासन के साफ निर्देश हैं कि किसी किसान को नोटिस आदि देकर उत्पीड़न की कार्रवाई न की जाए। फिलहाल वसूली भी स्थगित कर दी गई है। ऐसे में बैंकें किसानों पर खुल कर कर्ज अदायगी का दबाव नहीं बना पा रही हैं।
अब बैंकों ने वसूली के लिए अदालत का सहारा लिया है। विभिन्न बैंकों ने 13,361 कर्जदार किसानों पर पूर्व विवाद वसूली वाद लोक अदालत सिविल कोर्ट में दायर किया है। इसमें सबसे ज्यादा किसान इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने इन सभी किसानों को नोटिस जारी कर कहा है कि 12 नवंबर को प्रात:10 बजे लोक अदालत के समक्ष उपस्थित होकर बैंक द्वारा आयोजित विशेष अभियान में रियायतों को प्राप्त कर भविष्य में होने असुविधाओं तथा अप्रिय परिस्थितियों से बचें। यह भी लिखा है कि समझौता के समय पूरी या आंशिक समझौता राशि अवश्य लाएं।
यह नोटिसें बड़ी संख्या में किसानों को मिल चुकी हैं। बबेरू तहसील के बेल्दान गांव में चार दिन पूर्व किसान की मौत हो गई। परिजनों ने बताया था कि कर्ज की नोटिस मिलने के कुछ ही देर बाद उसे दिल का दौरा पड़ा और चल बसा। जिन किसानों को नोटिसें जारी की गई हैं उन पर 22 करोड़ 76 लाख 990 रुपये का कर्ज बाकी है।
ज्यादातर मामले केसीसी के हैं। उधर, अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम) जेके ढींगरा ने बताया कि लगभग 16 हजार कर्जदार किसानों को नोटिसें भेजी गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 14 हजार किसान इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के हैं। एलडीएम ने बताया कि लोक अदालत में कर्ज का मामला न निपटा तो कर्जदार के विरुद्ध बैंक डिक्री दायर कर सकता है। अन्य वसूली कार्रवाई भी कर सकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में कर्ज की कम से कम 25 फीसदी रकम जमा करने पर समझौता हो सकता है।