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बैंकों के ‘दांव’ में 18 हजार लघु-सीमांत किसान ‘चित’
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:12 AM IST
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बांदा। प्रदेश सरकार द्वारा लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी घोषणा में बैंकों के दांवपेंच आड़े आने लगे हैं। बैंकों से तैयार सूची में बांदा जनपद के करीब 18 हजार लघु-सीमांत किसान कर्जमाफी दायरे से बाहर हो गए हैं। यहां कर्जदार लघु-सीमांत किसानों की संख्या 1,37,000 से भी ज्यादा है। उन पर 10 अरब 35 करोड़ रुपये का कर्ज है। लेकिन बैंकों ने सिर्फ 1,19,151 किसानों को सूची में शामिल किया है। इन पर 6 अरब 75 करोड़ 38 लाख रुपया कर्ज है।
प्रदेश के मंत्रिमंडल ने करीब दो माह पूर्व एक लाख तक के लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने का निर्णय लिया था। बैंकों से ऐसे किसानों की सूची मांगी गई थी। बैंकों को शायद किसानोें पर सरकार की यह कृपा दृष्टि रास नहीं आ रही। कर्जमाफी सूची में तमाम दांवपेंच लगाए जा रहे हैं।
शासन ने बैंकोें से पूछा है कि केसीसी पर कितने किसानों ने कितना कर्ज 31 मार्च 2016 के पूर्व लिया है? ऐसे किसानों का नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाता आदि का सूची तलब की थी। सूत्रों के मुताबिक बैंकों ने सूची भेज दी है। इसमें लीड बैंक इलाहाबाद बैंक ने जिले के 1,19,151 किसानों पर बकाया 6 अरब 75 करोड़ 38 लाख रुपये माफ करने का प्रस्ताव भेजा है।
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शासन ने इन कर्जदार किसानों के आधार कार्ड, जमीन का रकबा, खतौनी संख्या, गाटा नंबर आदि भी मांगी है। जिले के करीब एक दर्जन बैंकों से 1,37,064 लघु और सीमांत किसानों ने 10 अरब 35 करोड़ 5 लाख रुपये का कर्ज ले रखा है। लेकिन बैंकों ने सिर्फ 1,19,151 किसानों की कर्जमाफी के लिए सूची भेजी है। इन किसानों पर 6 अरब 75 करोड़ 38 लाख का कर्ज है।
अब बैंक शासन के निर्देश पर किसानों के आधार कार्ड, खतौनी संख्या और गाटा नंबर की जानकारी जुटाने में जुटे हैं। कुल मिलाकर लघु-सीमांत किसानों की कर्जमाफी की गेंद बैंकों के पाले में है।
उधर, इस बारे में जिला अग्रणी बैंक के एलडीएम जेके ढींगरा का कहना है कि जो लघु-सीमांत किसान कर्जमाफी के दायरे में आते हैं उनकी सूची तैयार कर भेजी जा चुकी है। शासन ने कुछ और सूचनाएं मांगी हैं इन्हें भी भेजा जा रहा है। फैसला शासन को करना है। जिला सहकारी बैंक से संबद्ध सहकारी समितियों के कर्जदार लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी के लिए बैंक ने किसानों से बचत खाता संख्या, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और गाटा संख्या मांगी है।
सहकारिता विभाग के सहायक निबंधक सुरेश कुमार और कोआपरेटिव बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.आलोक कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बकायेदार सदस्यों का उपरोक्त ब्योरा समितियों के पास नहीं है। जिन बकायेदार सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है उनकी वारिस सहकारी समितियों में जाकर पासबुक के प्रथम पेज, आधार कार्ड और खतौनी की नकल तथा गाटा संख्या और खाता संख्या सहित हस्ताक्षर या अंगूठा निशान आदि की फोटोकापी समितियों को उपलब्ध करा दें। ताकि ऋण माफी योजना में उन्हें शामिल किया जा सके।
-कर्जमाफी सूची से इन किसानों को किया बाहर
-10 अरब में मात्र 6 अरब के कर्जदारों की सूची भेजी
-1.37 लाख कर्जदार किसानों में से 1.19 लाख शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
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प्रदेश के मंत्रिमंडल ने करीब दो माह पूर्व एक लाख तक के लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने का निर्णय लिया था। बैंकों से ऐसे किसानों की सूची मांगी गई थी। बैंकों को शायद किसानोें पर सरकार की यह कृपा दृष्टि रास नहीं आ रही। कर्जमाफी सूची में तमाम दांवपेंच लगाए जा रहे हैं।
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शासन ने बैंकोें से पूछा है कि केसीसी पर कितने किसानों ने कितना कर्ज 31 मार्च 2016 के पूर्व लिया है? ऐसे किसानों का नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाता आदि का सूची तलब की थी। सूत्रों के मुताबिक बैंकों ने सूची भेज दी है। इसमें लीड बैंक इलाहाबाद बैंक ने जिले के 1,19,151 किसानों पर बकाया 6 अरब 75 करोड़ 38 लाख रुपये माफ करने का प्रस्ताव भेजा है।
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शासन ने इन कर्जदार किसानों के आधार कार्ड, जमीन का रकबा, खतौनी संख्या, गाटा नंबर आदि भी मांगी है। जिले के करीब एक दर्जन बैंकों से 1,37,064 लघु और सीमांत किसानों ने 10 अरब 35 करोड़ 5 लाख रुपये का कर्ज ले रखा है। लेकिन बैंकों ने सिर्फ 1,19,151 किसानों की कर्जमाफी के लिए सूची भेजी है। इन किसानों पर 6 अरब 75 करोड़ 38 लाख का कर्ज है।
अब बैंक शासन के निर्देश पर किसानों के आधार कार्ड, खतौनी संख्या और गाटा नंबर की जानकारी जुटाने में जुटे हैं। कुल मिलाकर लघु-सीमांत किसानों की कर्जमाफी की गेंद बैंकों के पाले में है।
उधर, इस बारे में जिला अग्रणी बैंक के एलडीएम जेके ढींगरा का कहना है कि जो लघु-सीमांत किसान कर्जमाफी के दायरे में आते हैं उनकी सूची तैयार कर भेजी जा चुकी है। शासन ने कुछ और सूचनाएं मांगी हैं इन्हें भी भेजा जा रहा है। फैसला शासन को करना है। जिला सहकारी बैंक से संबद्ध सहकारी समितियों के कर्जदार लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी के लिए बैंक ने किसानों से बचत खाता संख्या, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और गाटा संख्या मांगी है।
सहकारिता विभाग के सहायक निबंधक सुरेश कुमार और कोआपरेटिव बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.आलोक कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बकायेदार सदस्यों का उपरोक्त ब्योरा समितियों के पास नहीं है। जिन बकायेदार सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है उनकी वारिस सहकारी समितियों में जाकर पासबुक के प्रथम पेज, आधार कार्ड और खतौनी की नकल तथा गाटा संख्या और खाता संख्या सहित हस्ताक्षर या अंगूठा निशान आदि की फोटोकापी समितियों को उपलब्ध करा दें। ताकि ऋण माफी योजना में उन्हें शामिल किया जा सके।
-कर्जमाफी सूची से इन किसानों को किया बाहर
-10 अरब में मात्र 6 अरब के कर्जदारों की सूची भेजी
-1.37 लाख कर्जदार किसानों में से 1.19 लाख शामिल
अमर उजाला ब्यूरो