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फोरलेन सड़क के लिए 2000 पेड़ों की बलि

Wed, 04 Dec 2019 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2019 11:57 PM IST
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2000 trees slaughtered for forelane road
नरैनी-सतना मार्ग पर काटे गए हरे पेड़ के ठूंठ। - फोटो : BANDA
नरैनी। फोरलेन सड़क के लिए 2000 से ज्यादा भारी-भरकम हरे-भरे पेड़ों की बलि ली जा रही है। युद्धस्तर पर चल रही पेड़ाें की कटान में अब तक एक हजार से ज्यादा पेड़ धराशायी किए जा चुके हैं।
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नरैनी से सीमावर्ती मध्य प्रदेश के सतना तक करीब 26 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। इसे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) बना रहा है। नरैनी नगर से कालिंजर होते हुए सतना (एमपी) बार्डर तक सड़क बननी है। इसके लिए मौजूदा सड़क की दाईं पटरी पर लगे आम, महुआ, जामुन, पीपल, बरगद, शीशम, यूकेलिप्टस, सिरसा, बबूल आदि के लगभग दो हजार पेड़ हैं। हालांकि वन निगम ने इनकी संख्या 1914 बताई है। सड़क निर्माण के लिए वन निगम इन पेड़ों की कटान करा रहा है। रात-दिन पेड़ कटान जारी है। इस बारे में क्षेत्रीय वनाधिकारी श्यामलाल यादव ने बताया कि वन विभाग ने सड़क निर्माण स्थल पर पड़ने वाले पेड़ों की संख्या 1914 दर्ज की थी। पिछले काफी दिनों से वन निगम इनकी कटाई करवा रहा है। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए पीडब्ल्यूडी ने भारत सरकार में निर्धारित राशि जमा कर अनुमति ली है। काटे गए पेड़ों के एवज में पौधरोपण कर दूसरे पौधे लगाए जाएंगे।
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खुलेआम हो रहे एनओसी शर्त का उल्लंघन
बांदा। सड़कों के नाम पर चौतरफा अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटान पर प्रवास सोसायटी के आशीष सागर का कहना है कि विकास के नाम पर यह अंधी दौड़ अब बुंदेलखंड और बांदा में भी पर्यावरण को नेस्तनाबूत करके इसे गैस चेंबर बना देगी। उन्होंने कहा कि बांदा-कानपुर फोरलेन चौड़ीकरण में 3534 महुआ के पेड़ काटे गए थे। बदले में एक भी नहीं लगा, जबकि एनओसी में शर्त होती है कि जहां जिस प्रजाति का पेड़ काटा जाएगा वहां उसी के आसपास उसी प्रजाति का पेड़ लगाया जाएगा। बुंदेलखंड में महोबा-कबरई-सागर हाईवे, झांसी-महोबा-बांदा-मिर्जापुर हाईवे में लगभग 10 हजार पेड़ काटे गए हैं। जल्द ही बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे निर्माण में भी हजारों पेड़ों की बलि चढ़ाई जाएगी। खुलेआम एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन हो रहा है। जनप्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अफसर चुप्पी साधे हैं।
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