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Banda News: खदान से निकले ट्रकों से 18 हजार की वसूली, लखनऊ में बिकती 45 हजार महंगी
Fri, 14 Nov 2025 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 14 Nov 2025 11:50 PM IST
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बांदा। अवैध मौरंग खनन के कारोबार में रसूखदारों के अलावा आरटीओ व खनन के जिम्मेदार अफसर शामिल हैं। पिछले दिनों बांदा व चित्रकूट में नौ पुलिस कर्मियों की संलिप्तता और अब फतेहपुर में लोकेशनबाजों पर कार्रवाई से यह गठजोड़ लोगों के सामने आ चुका है। मौरंग खदान से निकले 18 चक्का डंपर में मौरंग की कीमत 22 हजार होती है लेकिन यह कानपुर में पहुंचते ही 55 व लखनऊ में 75 हजार रुपये की बिकती है। जिससे बीच में कमीशनबाजी का खेल होता है। जिसमें 18 हजार रुपये रास्ते भर बंटते हुए जाते हैं। इन्हीं कारणों से मोटर मालिक ओवरलोड लेकर जाता हैं।
एक मोटर मालिक ने नाम ने प्रकाशित करने के आग्रह पर बताया कि मौरंग खदान में 18 चक्के का डंपर करीब 22 हजार रुपये में ओवरलोड भर जाता है। जिसे लखनऊ मंडी करनी होती है तो उसे 8 हजार रुपये डीजल के देकर रवाना कर दिया जाता है। इसके बाद रास्ते में उसे दो जनपद पार करने होते हैं। जिन्हें बारी-बारी रुपया देना पड़ता है। इस अवैध वसूली में आरटीओ-खनिज व लोकेटर शामिल रहते हैं। कुछ हिस्सा अधिकारियों के पास भी पहुंचता है। कुल मिलाकर 18 से 20 हजार रुपये बांटने में चला जाता है। इस कारण लखनऊ पहुंचने में मौरंग की कीमत 75 हजार हो जाती है।
ऐसे चलता था वसूली का खेल
बांदा-हमीरपुर से लेकर लखनऊ तक ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का पूरा नेटवर्क है। बिचौलिये रात में ही अधिकारियों को ट्रक नंबर और वसूली गई रकम की जानकारी भेज देते है ताकि सुबह किसी भी चेकिंग में ट्रक को न रोका जाए। अगर कोई ट्रक पकड़ा भी जाता है तो बिना चालान के उसे छोड़ दिया जाता है।
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एक मोटर मालिक ने नाम ने प्रकाशित करने के आग्रह पर बताया कि मौरंग खदान में 18 चक्के का डंपर करीब 22 हजार रुपये में ओवरलोड भर जाता है। जिसे लखनऊ मंडी करनी होती है तो उसे 8 हजार रुपये डीजल के देकर रवाना कर दिया जाता है। इसके बाद रास्ते में उसे दो जनपद पार करने होते हैं। जिन्हें बारी-बारी रुपया देना पड़ता है। इस अवैध वसूली में आरटीओ-खनिज व लोकेटर शामिल रहते हैं। कुछ हिस्सा अधिकारियों के पास भी पहुंचता है। कुल मिलाकर 18 से 20 हजार रुपये बांटने में चला जाता है। इस कारण लखनऊ पहुंचने में मौरंग की कीमत 75 हजार हो जाती है।
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ऐसे चलता था वसूली का खेल
बांदा-हमीरपुर से लेकर लखनऊ तक ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का पूरा नेटवर्क है। बिचौलिये रात में ही अधिकारियों को ट्रक नंबर और वसूली गई रकम की जानकारी भेज देते है ताकि सुबह किसी भी चेकिंग में ट्रक को न रोका जाए। अगर कोई ट्रक पकड़ा भी जाता है तो बिना चालान के उसे छोड़ दिया जाता है।
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