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पर्यावरण बचाने के लिए की ग्रीन मैरिज

Tue, 06 Jun 2017 07:11 PM IST
Updated Tue, 06 Jun 2017 07:11 PM IST
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पर्यावरण बचाने के लिए की ग्रीन मैरिज
फोटो 06 बीएनडी पी 1 : गंगा पुरवा में बैलगाड़ी में बारात लेकर आया दूल्हा गणेश।
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फोटो 06 बीएनडी पी 2 : शादी के बंधन में बंधने के बाद पौध रोपते दूल्हा-दुल्हन। साथ में कन्यादान करने वाली प्रधान सुमनलता और अध्यापक यशवंत पटेल।

फोटो 06 बीएनडी पी 3 : गंगा पुरवा में बारातियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाते वन विभाग के रेंजर जेके जायसवाल।


पर्यावरण बचाने के लिए
की बेटी की ‘ग्रीन मैरिज’
- दहेज में पीपल और अर्जुन के पौधे देकर विदा किया
- बैलगाड़ी पर आया दूल्हा, पत्तल पर हुआ खान-पान
- ग्रामीणों को भी पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई
अमर उजाला ब्यूरो
रशीद सिद्दीकी
बांदा।
छोटी सी शुरुआत ही सही, है बहुत महत्वपूर्ण। यहां के एक किसान ने बेटी की शादी पर्यावरण और प्रकृति को समर्पित होकर की। इसे ‘ग्रीन मैरिज’ का नाम भी दिया। शादी में बारात बैलगाड़ी से आई। पत्तल में सादा भोजन परोसा गया। विदाई से पहले दूल्हा-दुल्हन ने पौधरोपण किया। यही नहीं, दुल्हन को दहेज के रूप में पीपल और अर्जुन के पौधे देकर ससुराल में भी पर्यावरण संरक्षण के संस्कार को बढ़ाने की नसीहत दी।
नरैनी क्षेत्र के गंगापुरवा गांव में छोटे से किसान तेजा निषाद ने पर्यावरण संरक्षण की जोरदार पहल की है। सोमवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर जब तमाम सरकारी और गैरसरकारी संगठन लाखों रुपये खर्च करके पर्यावरण बचाने संबंधी लंबे चौड़े भाषण दे रहे थे। उस वक्त नरैनी क्षेत्र के गंगापुरवा गांव में कुछ अलग ही नजारा था। यहां अंत्योदय कार्डधारक किसान तेजा निषाद ने अपनी बेटी का ब्याह कई दशकों पुरानी ग्रामीण परंपरा के अनुसार किया। तेजा ने अपनी बेटी मैकी देवी की शादी पड़ोसी गांव काजीपुर के गणेश से की है। वर पक्ष भी शादी को ‘ग्रीन मैरिज’ के रूप में करने पर खुश था। वर-वधू पक्ष ने दहेज और आडंबर मुक्त शादी रचाते हुए पर्यावरण दिवस नायाब रूप में मनाया।
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रात करीब 9 बजे 11 बैलगाड़ियों के काफिले में बारात आई। बैलगाड़ियों के बैलों को पुरानी परंपरा के मुताबिक रंगबिरंगी पोशाक (झूल) पहनाई गई थी। सींगों पर रंगरोगन किया था। सबसे आगे की बैलगाड़ी में दूल्हा गणेश खुद सवार था। गांव के द्वार पर कन्या पक्ष ने बारात की अगुवानी की। प्रकृति का सम्मान दर्शाने वाली शादी में शायद प्रकृति (कुदरत) भी खुश हो गई। तेज हवा के झोंकों के बीच बूंदाबांदी से मौसम खुशगवार हो गया।
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लड़की के पिता ने अपनी रिहायशी झोपड़ी और पड़ोसी के मकान को हरे पत्तों से सजाया। बारातियों को कमल और छूल के पत्तों में सादा भोजन परोसा गया। फेरे लेने के बाद वधू मैकी देवी और वर गणेश ने गांव मेें ही पीपल और अर्जुन के पौधे रोपे। कन्यादान खलारी गांव की ग्राम प्रधान सुमनलता पटेल ने किया। अध्यापक यशवंत पटेल ने द्वारचार से लेकर शादी का खर्च वहन किया। ग्रीन मैरिज को हौसला देने के लिए वन विभाग के रेंजर जेके जायसवाल भी उपस्थित थे। उन्होंने वधू को 1100 रुपये देकर आशीष दिया। साथ ही वर-वधू समेत ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। प्रवास सोसायटी के स्वयंसेवी आशीष सागर पूरे समय उपस्थित और सहयोगी रहे। उन्होंने स्वयंसेवी कुलदीप शुक्ल समेत ग्राम प्रधान राकेश पांडेय और रोहित तिवारी आदि के साथ बारात की अगुवानी की।
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