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मंडल में सबसे ज्यादा प्रदूषण स्थानीय निकायों से

Tue, 14 May 2019 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 May 2019 11:39 PM IST
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मंडल में सबसे ज्यादा प्रदूषण स्थानीय निकायों से
चित्रकूटधाम मंडल में प्रदूषण फैलाने वालों में सरकारी और गैर सरकारी दोनों ही संस्थाएं शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण एक्ट का सबसे ज्यादा उल्लंघन मंडल के स्थानीय निकाय कर रहे हैं।
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इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका में सुनवाई कर रही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की मुख्य बेंच ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दाखिल किए गए जवाब पर बोर्ड को फटकार लगाई है।
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एनओसी न लेने वाले व्यवसायिक संस्थानों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। एनजीटी इस पर अगली सुनवाई 15 जुलाई 2019 को करेगी।


बांदा के समाजसेवी आशीष सागर दीक्षित ने अधिवक्ता राहुल चौधरी और शिरोन मैथ्यू के माध्यम से एनजीटी में जनहित याचिका दायर की है। इसमें बुंदेलखंड में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति (एनओसी) लिए बगैर व्यवसायिक संस्थान चलाने का मुद्दा उठाया गया है।
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एनजीटी इस पर सुनवाई कर रही है। इसी याचिका के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई संस्थानों को नोटिस जारी किए थे।


शुक्रवार (10 मई) को सुनवाई के दौरान एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अवधेश कुमार गोयल, न्यायिक सदस्य न्यायाधीश एसपी वांगणी, न्यायाधीश के. रामकृष्णा और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. नागिन नंदा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दाखिल किए गए जवाब पर मॉल, बिग बाजार, होटल, मैरिज हाल, पैथोलॉजी आदि को शामिल न किए जाने पर असंतोष जताया।

साथ ही अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एनजीटी में पेश करने के आदेश दिए। अगली सुनवाई 15 जुलाई 2019 को निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्ता आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि बुंदेलखंड में मॉल, होटल, मैरिज हाउस, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी इत्यादि प्रिवेंशन एंड कंट्रोल पाल्युशन एक्ट-1981, वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल पाल्युशन एक्ट-1974 और पर्यावरण संरक्षण एक्ट- 1986 का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।

इन्हीं चारों नियमों के तहत इन्हें एनओसी लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट मंडल के चारों जिलों में अवैध रूप से हजारों लीटर पानी का दोहन करके वाटर प्लांट लगाकर व्यवसाय किया जा रहा है।

अन्य व्यवसायिक संस्थानों में भी उल्लंघन हो रहा है। याचिका से एनजीटी में ऐसे अवैध संस्थानों पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। ब्यूरो

200 एमटी कचरा व 6 एमटी प्लास्टिक का प्रदूषण रोज
चित्रकूटधाम मंडल के पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रदूषण का पलीता यहां के स्थानीय निकाय लगा रहे हैं। यह बेहद हैरतअंगेज है कि मंडल के चारों जिलों के सभी 23 निकायों में से किसी ने भी ठोस या प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की यूनिट नहीं लगाई है।
मंडल में रोजाना लगभग 200 मीट्रिक टन ठोस कचरा और करीब छह मीट्रिक टन प्लास्टिक प्रदूषण फैला रही है।
एनजीटी में आशीष सागर की जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दाखिल किए गए अपने जवाब और जानकारियों में बताया है कि मंडल के चारों जिलों में कुल 23 स्थानीय निकाय हैं।

इनमें प्रतिवर्ष 72,160 मीट्रिक टन ठोस कचरा और 2167 मीट्रिक टन प्लास्टिक अपशिष्ट निकलता है। किसी भी निकाय ने अपशिष्ट निस्तारण प्रबंधन संबंधी इकाई स्थापित नहीं की है। बांदा में आठ, हमीरपुर में सात, महोबा में पांच और चित्रकूट में तीन स्थानीय निकाय हैं।


मंडल में स्थानीय निकायों में प्रतिवर्ष निकलने वाला ठोस व प्लास्टिक अपशिष्ट (मीट्रिक टन में)-

जनपद निकाय जनित ठोस अपशिष्ट प्लास्टिक
----- ----- --------------- -------
बांदा 8 35,295 1081
हमीरपुर 7 26,462 795
महोबा 5 5292 159
चित्रकूट 3 4380 132
----------------------------------------
योग 23 72,160 2167
----------------------------------------
शहरों में कस्बों से ज्यादा कचरा
कस्बों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट निकल रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े ही बता रहे हैं।

मंडल के बांदा नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 31,025 मीट्रिक टन ठोस कचरा और 930 मीट्रिक टन प्लास्टिक निकल रही है। अतर्रा नगर पालिका और हमीरपुर नगर पालिका परिषद में क्रमश: 2920 एमटी ठोस और 88 एमटी प्लास्टिक निकल रहा है।

राठ नगर पालिका में 15,330 एमटी ठोस कचरा और 460 एमटी प्लास्टिक, मौदहा नगर पालिका में 4562 एमटी ठोस कचरा और 137 एमटी प्लास्टिक निकल रही है।

महोबा नगर पालिका में 3820 ठोस कचरा और 115 एमटी प्लास्टिक तथा चरखारी नगर पालिका में 365 एमटी ठोस कचरा और 11 एमटी प्लास्टिक निकल रही है।

चित्रकूट की कर्वी नगर पालिका में 3650 एमटी ठोस कचरा और 110 एमटी प्लास्टिक कचरा प्रति वर्ष निकल रहा है।

मंडल में सबसे ज्यादा प्रदूषण स्थानीय निकायों से
एनजीटी की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार, प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई का ब्योरा तलब
अगली सुनवाई 15 जुलाई को करेगी एनजीटी
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