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घोषणा पत्रों से गायब हैं शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे
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स्टेट कलेक्टिव फार राइट टू एजूकेशन उत्तर प्रदेश में सबको शिक्षा, समान शिक्षा अभियान चला रहा है। शुक्रवार को यहां होटल में आयोजित बैठक में जर्नादन त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका लोगों का संवैधानिक अधिकार है।
लेकिन किसी राजनैतिक दल के घोषणा पत्र में यह स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है। बांदा में 20 श्रमिक विद्यालय खोले गए थे। गरीबों के लिए यह योजना सफल नहीं हुई।
मूल्यांकन करने वाली विद्यालय प्रबंध समिति को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। शबीना मुमताज ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून पूरे देश में लागू करने की मांग की। हर स्कूल में महिला शिक्षक अनिवार्य हो।
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रामकरन आदर्शी ने कहा कि शिक्षा पर काम करना भी राजनीति है। देवनंद ने संगठन का घोषणा पर का जिक्र करते हुए बच्चों के इस घोषणा पत्र को साझा करने पर जोर दिया। बैठक का संचालन अमृतलाल ने किया। देवी दयाल, अर्विजय, रामगोपाल, जगनंदन, शकीलुन, देवकली, संगीता, माया, देशराज, शिवकरन, धर्मेंद्र, रमन बाबू आदि शामिल रहे।
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लेकिन किसी राजनैतिक दल के घोषणा पत्र में यह स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है। बांदा में 20 श्रमिक विद्यालय खोले गए थे। गरीबों के लिए यह योजना सफल नहीं हुई।
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मूल्यांकन करने वाली विद्यालय प्रबंध समिति को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। शबीना मुमताज ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून पूरे देश में लागू करने की मांग की। हर स्कूल में महिला शिक्षक अनिवार्य हो।
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रामकरन आदर्शी ने कहा कि शिक्षा पर काम करना भी राजनीति है। देवनंद ने संगठन का घोषणा पर का जिक्र करते हुए बच्चों के इस घोषणा पत्र को साझा करने पर जोर दिया। बैठक का संचालन अमृतलाल ने किया। देवी दयाल, अर्विजय, रामगोपाल, जगनंदन, शकीलुन, देवकली, संगीता, माया, देशराज, शिवकरन, धर्मेंद्र, रमन बाबू आदि शामिल रहे।