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केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना पर पुर्नविचार करें राष्ट्रपति
Updated Wed, 12 Jul 2017 12:11 AM IST
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बांदा। केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। जागृति सेवा संस्थान अध्यक्ष जावेद हाशमी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर परियोजना पर पुनर्विचार किए जाने का अनुरोध किया है। कहा है कि नदियों का रुख मोड़े जाने से भविष्य में इसके घातक परिणाम हो सकते हैं।
हाशमी ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थितियों के विपरीत है। विस्तृत अध्ययन के बाद ही परियोजना शुरू की जानी चाहिए। कहा कि सदियों से नदियां स्वयं अपना रास्ता बनाती हैं और जल स्रोतों का विकास करतीं हैं।
हाइड्रो जियोलॉजिकल संकेत इस बात का प्रमाण हैं कि उन पर बढ़ती निर्भरता के कारण ही नदियों में पानी की उपलब्धता निरंतर कम हो रही है। दो नदियों का रुख मोड़ने का प्रयास प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध है। संबंधित क्षेत्रों के लिए परिणाम घातक भी हो सकते हैं।
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नदियों के अपस्ट्रीम व डाउन स्ट्रीम परिवर्तन से नदी का प्रवाह रुकेगा। नतीजे में जलधारा में मिट्टी की तह जम जाने से प्राकृतिक रूप से निर्मित जल स्रोत बंद हो सकते हैं। इससे नदियों के सूखने की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने राष्ट्रपति से केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना पर हस्तक्षेप करते हुए स्थानीय बुद्धिजीवियों की राय लेकर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। साथ ही विस्थापित होने वाले लोगों को उचित मुआवजा और उनके पुनर्वास की मांग की है।
-नदियों का रुख मोड़े जाने से परिणाम हो सकते हैं घातक
-नदियों का रास्ता बदलना प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध
-केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
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हाशमी ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थितियों के विपरीत है। विस्तृत अध्ययन के बाद ही परियोजना शुरू की जानी चाहिए। कहा कि सदियों से नदियां स्वयं अपना रास्ता बनाती हैं और जल स्रोतों का विकास करतीं हैं।
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हाइड्रो जियोलॉजिकल संकेत इस बात का प्रमाण हैं कि उन पर बढ़ती निर्भरता के कारण ही नदियों में पानी की उपलब्धता निरंतर कम हो रही है। दो नदियों का रुख मोड़ने का प्रयास प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध है। संबंधित क्षेत्रों के लिए परिणाम घातक भी हो सकते हैं।
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नदियों के अपस्ट्रीम व डाउन स्ट्रीम परिवर्तन से नदी का प्रवाह रुकेगा। नतीजे में जलधारा में मिट्टी की तह जम जाने से प्राकृतिक रूप से निर्मित जल स्रोत बंद हो सकते हैं। इससे नदियों के सूखने की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने राष्ट्रपति से केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना पर हस्तक्षेप करते हुए स्थानीय बुद्धिजीवियों की राय लेकर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। साथ ही विस्थापित होने वाले लोगों को उचित मुआवजा और उनके पुनर्वास की मांग की है।
-नदियों का रुख मोड़े जाने से परिणाम हो सकते हैं घातक
-नदियों का रास्ता बदलना प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध
-केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो