{"_id":"6814ec7339a5b537f402946a","slug":"women-became-the-charioteers-of-development-work-1001-took-up-the-work-of-mate-balrampur-news-c-99-1-slko1019-125390-2025-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: विकास कार्यों की सारथी बनीं महिलाएं, 1001 ने संभाला मेट का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: विकास कार्यों की सारथी बनीं महिलाएं, 1001 ने संभाला मेट का काम
विज्ञापन
बलरामपुर। मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इस योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक रूप से मदद भी कर रही हैं। मनरेगा में महिलाओं को श्रमिकों के साथ ही महिला मेट की जिम्मेदारी भी दी गई है।
जिले की 794 ग्राम पंचायतों में से 1,001 ग्राम पंचायतों में महिला मेट तैनात हो चुकी हैं। तुलसीपुर ब्लॉक में सबसे अधिक 148 महिला मेट तैनात की गई है, जबकि पचपेड़वा में 143 और उतरौला में 70 महिला मेट हैं। इसी तरह अन्य ब्लॉकों में भी महिला मेट की तैनाती की गई है। मनरेगा में महिला मेट के काम संभालने के बाद महिला श्रमिकों की संख्या में इजाफा हुआ है। 35 से 50 हजार महिलाएं ही अब तक मनरेगा में काम करने के लिए सक्रिय रहती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 1.55 लाख हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं है, लेकिन मनरेगा ने महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। गांव में ही महिलाओं को रोजगार मिले इसके लिए मनरेगा में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा रही है।
आर्थिक रूप से सशक्त बन रही महिलाएं
मनरेगा में काम करके महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। 100 दिन का काम पूरा करने वाली महिलाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे स्वरोजगार में भी सक्षम हो रही हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। - सुशील कुमार अग्रहरि, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले की 794 ग्राम पंचायतों में से 1,001 ग्राम पंचायतों में महिला मेट तैनात हो चुकी हैं। तुलसीपुर ब्लॉक में सबसे अधिक 148 महिला मेट तैनात की गई है, जबकि पचपेड़वा में 143 और उतरौला में 70 महिला मेट हैं। इसी तरह अन्य ब्लॉकों में भी महिला मेट की तैनाती की गई है। मनरेगा में महिला मेट के काम संभालने के बाद महिला श्रमिकों की संख्या में इजाफा हुआ है। 35 से 50 हजार महिलाएं ही अब तक मनरेगा में काम करने के लिए सक्रिय रहती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 1.55 लाख हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं है, लेकिन मनरेगा ने महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। गांव में ही महिलाओं को रोजगार मिले इसके लिए मनरेगा में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन
आर्थिक रूप से सशक्त बन रही महिलाएं
मनरेगा में काम करके महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। 100 दिन का काम पूरा करने वाली महिलाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे स्वरोजगार में भी सक्षम हो रही हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। - सुशील कुमार अग्रहरि, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार
विज्ञापन