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चार गांवों पर टूट रहा राप्ती नदी के कटान का कहर
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फोटो-2-बलरामपुर के लालपुर गांव में राप्ती नदी से कट रहा लोगों का मकान व जमीन।(संवाद)
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। सदर तहसील के पांच गांवों पर राप्ती नदी के कटान का कहर टूट रहा है। जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूरी राप्ती नदी के कटान का तांडव जारी है। बेशकीमती जमीनों के साथ लोगों के घरों को भी राप्ती नदी निगल रही है। कटान प्रभावित पीड़ितों ने प्रशासन पर मदद न करने का आरोप लगाया है। राप्ती नदी ने पिछले साल ग्रामीणों की 500 बीघे जमीन, स्कूल का भवन व मंदिर को कटान करके निगल लिया है। यदि राप्ती नदी के कटान पर अंकुश नहीं लगाया गया तो यहां के लोग बेघर हो जाएंगे।
सदर तहसील से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम लालपुर, फगुइया, गोंसाईपुरवा, कल्यानपुर व झौहना में राप्ती नदी के कटान से यहां के लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नदी के कटाने से परेशान ग्रामीण अयोध्या प्रसाद, कल्लू, लल्लू, राम संवारे, बलदेव, शिवकुमार व कृपाराम आदि का कहना है कि राप्ती नदी के बेतरतीब कटान से उनके गांव टॉपू बन चुके हैं। गांव के बाहर जाने के लिए यहां के लोगों का सिर्फ नाव का ही सहारा है। प्राथमिक विद्यालय कल्यानपुर का भवन पिछले साल राप्ती नदी ने कटान करके निगल लिया। गांव में बना मंदिर भी राप्ती नदी की धारा में बह गया है।
पांचों गांवों के करीब 500 बीघे बेशकीमती जमीन राप्ती नदी में समाहित हो गई है। नदी की कटान के चलते इन गांवों में विद्युतीकरण भी नहीं हो सका है। स्कूल भवन प्रभावित होने से यहां बच्चों को शिक्षा से भी वंचित होना पड़ रहा है। स्कूल में तैनात शिक्षक नदी के उस पार सरदारगढ़ गांव में आकर रुकते हैं और वहीं से वापस लौट जाते हैं। कटान प्रभावित पीड़ितों ने प्रशासन से मांग किया है कि उनकी बेशकीमती जमीनों के नदी में समाहित होने के बाद उन्हें मुआवजा दिया जाए। सरकार व प्रशासन की तरफ से कटान पीड़ितों को अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई है। राप्ती नदी के कटान को रोकने का प्रबंध किया जाए।
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बाढ़ खंड के अधिकारियों को दिया निर्देश
राप्ती नदी के कटान प्रभावित क्षेत्रों में कटानरोधी कार्य कराने का निर्देश बाढ़ खंड के अधिकारियों को दिया गया है। राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों से कटान पीड़ितों के नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। आकलन रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन स्तर से शीघ्र ही कटान पीड़ितों को मदद मुहैया कराई जाएगी। कल्यानुपर गाव के स्कूल भवन का निर्माण कराने के लिए बीएसए को निर्देश दिया गया है। अरुण कुमार शुक्ल, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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सदर तहसील से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम लालपुर, फगुइया, गोंसाईपुरवा, कल्यानपुर व झौहना में राप्ती नदी के कटान से यहां के लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नदी के कटाने से परेशान ग्रामीण अयोध्या प्रसाद, कल्लू, लल्लू, राम संवारे, बलदेव, शिवकुमार व कृपाराम आदि का कहना है कि राप्ती नदी के बेतरतीब कटान से उनके गांव टॉपू बन चुके हैं। गांव के बाहर जाने के लिए यहां के लोगों का सिर्फ नाव का ही सहारा है। प्राथमिक विद्यालय कल्यानपुर का भवन पिछले साल राप्ती नदी ने कटान करके निगल लिया। गांव में बना मंदिर भी राप्ती नदी की धारा में बह गया है।
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पांचों गांवों के करीब 500 बीघे बेशकीमती जमीन राप्ती नदी में समाहित हो गई है। नदी की कटान के चलते इन गांवों में विद्युतीकरण भी नहीं हो सका है। स्कूल भवन प्रभावित होने से यहां बच्चों को शिक्षा से भी वंचित होना पड़ रहा है। स्कूल में तैनात शिक्षक नदी के उस पार सरदारगढ़ गांव में आकर रुकते हैं और वहीं से वापस लौट जाते हैं। कटान प्रभावित पीड़ितों ने प्रशासन से मांग किया है कि उनकी बेशकीमती जमीनों के नदी में समाहित होने के बाद उन्हें मुआवजा दिया जाए। सरकार व प्रशासन की तरफ से कटान पीड़ितों को अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई है। राप्ती नदी के कटान को रोकने का प्रबंध किया जाए।
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बाढ़ खंड के अधिकारियों को दिया निर्देश
राप्ती नदी के कटान प्रभावित क्षेत्रों में कटानरोधी कार्य कराने का निर्देश बाढ़ खंड के अधिकारियों को दिया गया है। राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों से कटान पीड़ितों के नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। आकलन रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन स्तर से शीघ्र ही कटान पीड़ितों को मदद मुहैया कराई जाएगी। कल्यानुपर गाव के स्कूल भवन का निर्माण कराने के लिए बीएसए को निर्देश दिया गया है। अरुण कुमार शुक्ल, एडीएम वित्त एवं राजस्व