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Balrampur News: ग्राम प्रधान न होने से गांव का नहीं हो रहा विकास
Sat, 08 Feb 2025 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 08 Feb 2025 12:56 AM IST
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बलरामपुर के हरनहवा सुस्ता गांव में सड़क पर व्याप्त जलभराव व कीचड़।
गौरा चौराहा (बलरामपुर)। गैसड़ी ब्लॉक की ग्राम पंचायत हरनहवा सुस्ता में वर्ष 2021 से कोई ग्राम प्रधान नहीं है। प्रधान न होने से गांव में विकास की गति थम गई है। न तो संपर्क मार्ग है और न ही जलनिकासी के लिए पक्की नालियां बनी हैं। रास्ते पर कीचड़ होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। ग्रामीणों को पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ता है।
ग्रामवासी अशोक कुमार यादव और निब्बर गौतम ने बताया कि वर्ष 2016 से 2021 तक ग्राम पंचायत हरनहवा सुस्ता की प्रधानी ओबीसी के लिए आरक्षित थी। विमला देवी यहां ग्राम प्रधान थीं। वर्ष 2021 में प्रधान पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। पूरी ग्राम पंचायत में एक भी अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई व्यक्ति न होने के कारण यहां चुनाव ही नहीं हो पाया। ग्राम प्रधान का चुनाव न होने के कारण यहां का विकास पूरी तरह थम गया है।
कृष्ण कुमार ने बताया कि गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। नालियां टूट गई हैं, ऐसे में घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है। सड़क क्षतिग्रस्त होने व कीचड़ व जलभराव के कारण हम लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मंतराम ने बताया कि गांव से ब्लॉक की दूरी 15 किमी है। गांव के एक तरफ नदी और एक तरफ नाला होने के कारण बारिश के दिनों में कच्ची सड़क पर आवागमन ठप हो जाता है। दीपक ने बताया कि यहां सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। गांव में अधिकांश इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हैं। ऐसे में गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए भटकना पड़ता है।
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ग्रामवासी अशोक कुमार यादव और निब्बर गौतम ने बताया कि वर्ष 2016 से 2021 तक ग्राम पंचायत हरनहवा सुस्ता की प्रधानी ओबीसी के लिए आरक्षित थी। विमला देवी यहां ग्राम प्रधान थीं। वर्ष 2021 में प्रधान पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। पूरी ग्राम पंचायत में एक भी अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई व्यक्ति न होने के कारण यहां चुनाव ही नहीं हो पाया। ग्राम प्रधान का चुनाव न होने के कारण यहां का विकास पूरी तरह थम गया है।
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कृष्ण कुमार ने बताया कि गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। नालियां टूट गई हैं, ऐसे में घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है। सड़क क्षतिग्रस्त होने व कीचड़ व जलभराव के कारण हम लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मंतराम ने बताया कि गांव से ब्लॉक की दूरी 15 किमी है। गांव के एक तरफ नदी और एक तरफ नाला होने के कारण बारिश के दिनों में कच्ची सड़क पर आवागमन ठप हो जाता है। दीपक ने बताया कि यहां सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। गांव में अधिकांश इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हैं। ऐसे में गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए भटकना पड़ता है।
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